स्कूल की छुट्टियां-2 । भूरी चली गई । (भाग 2)

स्कूल की छुट्टियां-2 । भूरी चली गई । (भाग 2)


स्कूल की छुट्टियां-2 । भूरी चली गई । (भाग 2)। स्कूल की छुट्टियां चालू हो गई हैं। हर साल की तरह हम फिर शिमला आए हैं। भूरी से खेलना मुझे बहुत पसंद है।लोग सोचते हैं, बिल्ली मतलबी होती है। कुत्ते की तरह वफादार नहीं। पर ऐसा नहीं है। बिल्ली भी अपने मालिक से बहुत प्यार करती हैं। बस उसके जताने का तरीका अलग होता है।

स्कूल की छुट्टियां-2 । भूरी चली गई । (भाग 2)। स्कूल की छुट्टियां चालू हो गई हैं। हर साल की तरह हम फिर शिमला आए हैं। स्कूल की छुट्टियां 2

शिमला में मेरी दादी रहती हैं। प्रधान चाचा की बिल्ली भूरी से खेलना मुझे बहुत पसंद है। पर इस बार मेरी उससे मुलाकात ही नहीं हुई है।

वो म्याऊ म्याऊ करती घूमती रहती थी इधर उधर। इस बार दिखाई ही नहीं दी इतने दिनों में भी।
स्कूल की छुट्टियां-2

पढ़ें: 

स्कूल की छुट्टियां । भुरी चली गई । भाग 1

दादी भुरी कहां चली गई है? बताओ ना कहां गई वो? क्या बिल्लियां बिल्कुल वफादार नहीं होती। क्या वो किसी की दोस्त नहीं बनती बताओ ना? 

प्रधान चाचा गुस्से में बोल रहे थे बिल्लियां किसी की नहीं होती। धोखेबाज होती हैं। क्या ये सही है दादी?
स्कूल की छुट्टियां 2

लोग सोचते हैं, बिल्ली मतलबी होती है। कुत्ते की तरह वफादार नहीं। पर ऐसा नहीं है। बिल्ली भी अपने मालिक से बहुत प्यार करती हैं। बस उसके जताने का तरीका अलग होता है।

पर चाची से मैंने पूछा तो चाची ने कहा, उनकी भुरी, बहुत प्यारी थी। और उनको भी वह बहुत प्यार करती थी। दादी बताओ ना फिर वो क्यों चली गई।

दादी ने मुझे एक तरफ बैठाया। और फिर समझने लगी।

 बिटिया रानी,  लो आज सुनो एक ऐसी कहानी, जो तुम्हे याद रहे पूरी जिंदगानी।

माना कि बिल्ली होती है अलग,

बिल्कुल अलग, कुत्तों से अलग,

फिर दादी ने बताना शुरू की वो बातें जिन्होंने बिल्लियों के लिए मेरी सोच बदल दी।

लोग सोचते हैं, बिल्ली मतलबी होती है। कुत्ते की तरह वफादार नहीं। पर ऐसा नहीं है।

बिल्ली भी अपने मालिक से बहुत प्यार करती हैं। बस उसके जताने का तरीका अलग होता है।

वो अपना गाल रगड़ कर चलती है उन लोगों से, जिनको वो पसंद करती है। उसे थोड़ा छू छू कर चलना पसंद होता है।

उससे सफाई पसंद होती है। वो बड़ी स्वतंत्र होती है।बड़ी सामाजिक और सहज।

वो हर उस जगह से हट जाती हैं, जहां का वातावरण सुखमय नहीं होता। वो झगडे, झंझट, लड़ाई से ज्यादातर दूर रहना पसंद करती हैं। 

स्कूल की छुट्टियां-2 । भूरी चली गई । (भाग 2)। स्कूल की छुट्टियां चालू हो गई हैं। हर साल की तरह हम फिर शिमला आए हैं। भूरी से खेलना मुझे बहुत पसंद है।

कोई परिस्थिति अनुकूल ना हो तो वो बैठ कर उसके सुधरने का इंतज़ार नहीं करतीं। खुद एक अनुकूल परिस्थिति की तलाश करती हैं। 

वो जब परेशान होती हैं, तो एकांत में बैठ कर वापस अपने चित्त को काबू में लाती हैं।

उन्हें भीड़ में रहना पसंद नहीं होता। वो अपनी मानसिक शांति को बनाए रखती हैं।

उन्हें उपेक्षा और दुराचार पसंद नहीं आता। ऐसे में वो अपने लिए नई जगह तलाशने लगती हैं। वो तनाव में रहना पसंद नहीं करतीं।

जब बिल्लियां बीमार पड़ जाती हैं या घायल होती है तो भी वो कहीं जा कर छुप जाती हैं। 

इसलिए तुम उसकी ज्यादा चिंता मत करो। वो आ जाएगी। बिल्लियों जैसी बनो, मेरी गुड़िया रानी।

लोग सोचते हैं, बिल्ली मतलबी होती है। कुत्ते की तरह वफादार नहीं। पर ऐसा नहीं है। बिल्ली भी अपने मालिक से बहुत प्यार करती हैं। बस उसके जताने का तरीका अलग होता है।

बिल्ली को इस तरह से नहीं जानती थी मैं। लग रहा है, जैसे थोड़ी बिल्ली जैसी तो मैं भी हूं।

भुरी मुझे इस गर्मी की छुट्टी में इतना कुछ सीखा के चली गई।

चाची से कहा है मैंने, जब भुरी आए तो वो मुझे खबर करें।

और चाची ने कहा है, अगले साल वो मुझे भुरी के साथ खेलने देंगी।

Please follow and like us:
Share

2 thoughts on “स्कूल की छुट्टियां-2 । भूरी चली गई । (भाग 2)

hi there, thanks for visiting. Please give your feedback.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Translate »
error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

%d bloggers like this: