Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन!

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन ! एग्जाम पास आने के साथ ही थकावट ज्यादा नींद आना ज्यादा भूख लगना आम बात है परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन की तरफ परीक्षार्थी का ध्यान नहीं जाता आमतौर पर पढ़ने वाले बच्चों में एंट्रेंस एग्जाम 10वीं 12वीं या किसी अन्य परीक्षा के दौरान वजन बढ़ने पेट खराब रहने आलस आने जैसी शिकायतें सामने आती हैहेल्दी स्नैकिंग वो आखिरी चीज है जिसके बारे में एक स्टूडेंट सोचता है।

त्वरित कॉफी और टेक-वे पिज्जा की आदत डालना आसान है, क्योंकि आप भोजन पर विस्तार से समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। लेकिन, वास्तव में, बच्चों के अध्ययन की योजना का एक हिस्सा अच्छा पोषण भी होना चाहिए क्योंकि आपके मस्तिष्क को जितना बेहतर ईंधन मिलेगा, आप उतना ही बेहतर अध्ययन करेंगे।

 एग्जाम पास आने के साथ ही थकावट ज्यादा नींद आना ज्यादा भूख लगना आम बात है परीक्षा के दौरान  पौष्टिक भोजन  की तरफ परीक्षार्थी का ध्यान नहीं जाता

एग्जाम के दौरान हेल्दी ईटिंग    फोटो Pexels से Giftpundits.com

चाहे आप एक परीक्षार्थी हैं या परीक्षार्थी की माता,  परीक्षा या उसकी तैयारी के दौरान किस तरह पौष्टिक भोजन दिनचर्या में शामिल हो सकता है यह जानने के लिए इन सुझावों  पर ध्यान दें

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

परीक्षा के दौरान सही भोजन के 10 सुझाव:

  1. दैनिक विटामिन और खनिज आवश्यकताओं की पूर्ति करने पर यह काम आसान हो जाएगा। अच्छी तरह से अध्ययन करने के लिए आवश्यक शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बनाए आवश्यक है जिसके लिए आयरन और विटामिन बी विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। आयरन युक्त खाद्य पदार्थ: रेड मीट, अनाज और पालक। कुछ खाद्य पदार्थ जिनमें बी विटामिन होते हैं: साबुत अनाज,, अंडे और नट्स। कुछ अन्य खाद्य पदार्थ जो मस्तिष्क के लिए पोषक तत्व प्रदान करते हैं वे हैं मछली और सोया। 
  2. दवाइयों की तुलना में भोजन हमेशा एक बेहतर विकल्प होता हैएक संतरे में न केवल विटामिन सी होता है, बल्कि फाइबर, बीटा कैरोटीन और अन्य खनिज भी होते हैं। फल आपके दिमाग के लिए सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों में से एक है। फलों की प्राकृतिक शर्करा स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करती है। ब्लूबेरी में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट और अन्य पोषक तत्व होते हैं। 
  3. नियमित भोजन करना पोषक तत्वों और ऊर्जा के स्तर को अधिक स्थिर रखने में मदद करता है। नियमित अंतराल पर खाएं।
  4. थोड़ा-थोड़ा खाइए कई बार खाइए  दिन में तीन बार ज्यादा खा लेने से मस्तिष्क और शारीरिक रूप से आप थोड़े दिन में हो जाते हैं। एक सैंडविच, ताजे फल, फ्रूट स्मूदी, ड्राई फ्रूट्स, शहद में लिपटे नट्स, सूप, दिलचस्प सलाद आदि अच्छे विकल्प हैं।
  5. दोस्तों से नाश्ते  पर मिलिए  अगर आपको लगता है की पढ़ाई के लिए आपको अपने मित्रों से मिलना है तो इसके लिए समय सुबह नाश्ते के दौरान निकालिए। ओट्स, मूसली, उपमा, खिचड़ी, इडली आदि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के साथ बढ़िया विकल्प हैं जो ग्लूकोज की निरंतर और स्थिर आपूर्ति प्रदान करते हैं।
  6. जल ही जीवन है। जब आप अपने कमरे में ऐसी चला कर आराम से बैठे हैं तो आपको प्यास नहीं लगती है और इसलिए आप कम तरल पदार्थ पीते हैं। निर्जलित होने पर, शरीर और मन चकित, बेचैन होने लगता है। पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना कठिन  हो जाता है। अपने पेय पदार्थों का चुनाव सूझबूझ से करें। कैफीन, चीनी का सेवन कम करें। चूंकि बहुत अधिक कैफीन आपको चिड़चिड़ा बना सकती है, मध्यम मात्रा में पीने की कोशिश करें: प्रति दिन 400 से 450 मिलीग्राम, 2 / 2.5 कप के बराबर, (16 से 20 औंस या 500 से 625 मिलीलीटर)। पानी, फलों का रस, दूध, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, मिल्कशेक, ताजा सूप, नींबू पानी, लस्सी और नारियल पानी बेहतर विकल्पों में शामिल हैं। वातित पेय से बचें। प्रति दिन कम से कम 8-10 गिलास पानी लें।
  7. पावर पैक्ड सब्जियां चुनेंसभी सब्जियां  मैं एक समान पोषक तत्व नहीं होते हैं। गहरे रंग की  सब हल्के रंग की सब्जियों के अपेक्षा ज्यादा पोषक तत्व होते हैं
  8. पढ़ाई करते समय स्मार्ट तरीके से नाश्ता करें। पोषक तत्वों को संतुलित करने और अपने रक्त-शर्करा के स्तर को स्थिर रखने के लिए अपने स्नैक्स को दो खाद्य समूह  मैं /करें। जब आप देर रात तक पढ़ रहे हों भोजन के बीच में हेल्दी स्नैक्स खाएं जैसे प्रोटीन बार, ताजे फल, मूंगफली, मखाना और भुना हुआ चना आदि।
  9.  मस्तिष्क को अच्छी तरह से खिलाना आसान है ब्रेन बूस्टिंग फूड्स में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं जो स्मृति और एकाग्रता में सुधार करते हैं जैसे- बादाम, अखरोट, मछली, केला, चना, पालक, ब्रोकोली, आदि 
  10. जंक फूड से बचें।। चॉकलेट, कुकीज़ आदि जैसे खाद्य पदार्थ रक्त में शर्करा के स्तर में अचानक वृद्धि कर सकते हैं। थोड़ी देर के बाद, पेट फिर खाली लगता है।

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

10 वीं टिप तक बने रहने के लिए धन्यवाद।

आपके परीक्षा के समय को कम तनावपूर्ण बनाने के लिए आपके लिए अतिरिक्त 6 महत्वपूर्ण सुझाव।

  1. आठ घंटे की अच्छी नींद जरूरी है। अच्छी नींद आपके मस्तिष्क के लिए उतनी ही  अच्छी है जितना शरीर के लिए भोजन। कम नींद सीखने की क्षमता में बाधा उत्पन्न कर सकती है, मूड स्विंग का कारण बन सकती है और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कम कर सकती है।
  2. अपने आप को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रखें।खुद को खुश और प्रेरित रखने के लिए कुछ मनोरंजक गतिविधि के लिए प्रतिदिन एक घंटा घर से बाहर निकालें।
  3. तनाव कम रखने वाले खाद्य पदार्थ  का उपभोग करें। परीक्षा जैसे तनावपूर्ण समय के दौरान, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और सी जैसे कुछ पानी में घुलनशील विटामिन के लिए शरीर की आवश्यकता, जस्ता जैसे खनिज बढ़ जाते हैं। ये अधिवृक्क हार्मोन के संश्लेषण और कार्य में मदद करते हैं जो मूल रूप से हमारे तनाव से लड़ने वाले हार्मोन हैं। ब्राउन राइस, नट्स, अंडे, ताजा सब्जी और फल मदद कर सकते हैं।
  4. मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ  का उपभोग करें: एंटीऑक्सिडेंट जैसे विटामिन ए, सी और ई मस्तिष्क की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करते हैं जो कि मुक्त कणों से लड़कर तनाव को बढ़ाते हैं। अंडे, मछली, गाजर, कद्दू, हरी पत्तेदार सब्जी, ताजे फल इस आवश्यकता को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। वे शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाने में भी मदद करते हैं और परीक्षा के दौरान बच्चे के बीमार पड़ने की संभावना को कम करने में मदद करते हैं।
  5. याददाश्त बढ़ाने वाले वाले खाद्य पदार्थ  का उपभोग करें। मुख्य रूप से मछली में पाए जाने वाले ओमेगा 3 फैटी एसिड को मस्तिष्क की कार्यक्षमता और याददाश्त बढ़ाने के लिए उपयोगी माना जाता है।  जैसे कि सामन (कच्ची मछली), हेरिंग (भिंग) या मैकेरल (चूड़ा)। यदि आप मछली नहीं खाते हैं या अच्छी मछली तक पहुंच नहीं रखते हैं, तो अपने आहार में ग्राउंड फ्लैक्स सीड्स (अलसी), कद्दू के बीज, तिल के बीज (तिल), सोयाबीन तेल, कैनोला तेल को शामिल करें। 
  6. परीक्षा के दौरान बाहर का खाना खाने से बचें। एग्जाम के समय होने वाले  तनाव के कारण शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कम हो जाती है और बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जितना हो सके बाहर का खाना खाने से बचें। 

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान स्वस्थ खाने के कुछ उदाहरण 

नाश्ते मेंओट्स, मूसली, उपमा, खिचड़ी, इडली, अंडे, पोहा, इडली, डोसा, ढोकला
भोजनलाल मांस, अनाज और पालक, साबुत अनाज, गेहूं के बीज, अंडे और नट्स, मछली और सोया, ब्राउन चावल, ताजा सब्जियों और फलों, गाजर, कद्दू, अलसी, कद्दू के बीज, तिल के बीज (तिल), सोयाबीन का तेल, कैनोला तेल, दूध और दूध उत्पादों, स्प्राउट्स, तंबू, चिकन, दलिया, जई, क्विनोआ, और पूरे गेहूं उत्पादों जैसे अनाज।
स्नैक्ससेब, केला, गाजर या मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स, ताजे फल, फ्रूट स्मूदी, शहद में लिपटे नट्स, सूप, दिलचस्प सलाद, प्रोटीन बार, फ्रेश फ्रूट्स, मूंगफली, मखाना और चना, दूध और दूध से बने उत्पाद , स्प्राउट्स, टोफू, अंडे, चिकन, मछली, डलिया, जई, क्विनोआ 
हाइड्रेशनपानी, फलों का रस, दूध, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, मिल्कशेक, ताजा सूप, नींबू पानी, लस्सी और नारियल पानी। 
इनसे बचेंचॉकलेट, कुकीज़, वातित पेय, फास्ट फूड, भारी और तैलीय भोजन
परीक्षा के दौरान स्वस्थ भोजन । एक्जाम और तैयारी के दौरान स्वस्थ भोजन के कुछ स्वस्थ विकल्पों के उदाहरण।

Healthy Eating during Exams

 पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और उचित नींद लेना ताजे और स्वस्थ दिमाग की कुंजी है।

शुभकामनाएं।

जानिए अपने बच्चों को अनुशासन में लाने के  ऐसे आठ वैकल्पिक तरीके जब शारीरिक दंड देना आवश्यक नहीं है

अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की 9 टिप्स

होमवर्क का उद्देश्य क्या है?

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

क्या अनुशासन के लिए शारीरिक दंड ठीक है?

क्या अनुशासन के लिए शारीरिक  दंड ठीक है? Is Physical punishment OK to discipline your child?

माता-पिता आमतौर बच्चों या किशोरों पर अवांछित व्यवहार के जवाब में अनुशासित करने के लिए  शारीरिक दंड देते हैं।

लड़कों को लड़कियों की तुलना में अक्सर घर और स्कूल दोनों जगह ज्यादा शारीरिक दंड दीया जाता है। कुछ देशों ने बच्चों की पिटाई को घरों, स्कूलों सहित हर सेटिंग में  दंडनीय अपराध ठहराया है।

शारीरिक दंड में शारीरिक बल का उपयोग शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को शारीरिक दर्द या परेशानी का अनुभव होता है 

ऐसा  बच्चों के व्यवहार में सुधार लाने या उन्हें दंडित करने के लिए किया जाता है।

इसमें मारना,  नोचना, घसीटना, भूखे रखना इत्यादि शामिल हैं।  

क्या एक बच्चा को शारीरिक रूप से दंडित करना अथवा मारना कभी ठीक है? यह हर माता-पिता के लिए एक बड़ा सवाल है। 

मैंने इस प्रश्न को विभिन्न सामाजिक स्थलों के सर्वेक्षण के रूप में लिखा है और पाया कि वर्तमान समय में माता-पिता की मानसिकता बदल रही है

 हर  माता पिता   बच्चों को मार  कर सुधारने के पक्ष में नहीं है

 कोई भी अपने बच्चे को मज़े के लिए डांटना या मारना नहीं चाहता है। यह सवाल तब उठता है जब बच्चे के अनुशासन की बात आती है।

हालांकि अधिकांश लोग  बच्चों को शारीरिक दंड देने की बात पर इनकार करते हैं परंतु फिर भी बहुत से माता पिता बच्चों को अनुशासन सिखाते हुए गुस्से में थोड़ा हाथ उठाए देते हैं

 सिर पर छोटी सी  मार या धीरे से चिमटी काटना भी बच्चों को अनुशासित करने के वह तरीके हैं जो शायद शारीरिक दंड का ही रूप है

क्या अनुशासन के लिए शारीरिक  दंड ठीक है? माता-पिता आमतौर बच्चों या किशोरों पर अवांछित व्यवहार के जवाब में  शारीरिक दंड देते हैं।

शारीरिक दंड विरोधियों के अनुसार:

अधिकांश बाल मनोवैज्ञानिक, बाल रोग विशेषज्ञ, तथाकथित पैरेंटिंग विशेषज्ञ, शिक्षक और मध्यवर्गीय माता-पिता  जो शारीरिक दंड का विरोध करते हैं उनके अनुसार:

  • पिटाई से बच्चे को जीवन भर का भावनात्मक नुकसान हो सकता है। 
  • कभी-कभी यह शारीरिक नुकसान भी पहुंचा सकता है।
  • एक बच्चे को मारना उन्हें हिंसक वयस्क बनना सिखाता है।

 इसके अलावा, उनके अनुसार एक बच्चे को अनुशासित करने के लिए बहुत सारे अन्य तरीके अपनाए जा सकते हैं।

शारीरिक दंड के समर्थकों के विचार: 

शारीरिक दंड के समर्थक अक्सर वे होते हैं जो सोचते हैं कि यदि  वे अपने बचपन में मार खाकर अनुशासित हो सकते हैं तो उनके बच्चों को भी इस तरह अनुशासित करना ठीक है। 

  • समर्थकों का कहना है कि शारीरिक दंड मिलने के डर से बच्चे जल्दी अनुशासन में आ जाते हैं और उनको   अनुशासन भांग ना करने की बेहतर समझ पैदा होती है। 
  • यह भी तर्क है कि कभी-कभी जा बच्चा बेवजह या बुरी तरह से दुर्व्यवहार कर रहा होता है और माता-पिता के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। 
  •  समर्थकों का यह भी कहना होता है कि किस तरह उनका बच्चा मार खाकर तुरंत बात मान लेता है जबकि वे माता-पिता जो व्यवहार को बदलने के लिए शारीरिक दंड का उपयोग नहीं करते उनको अपने बच्चे को अनुशासित करने के लिए लंबे समय तक बार-बार एक ही बात  दौरानी होती है और यह भी पक्का नहीं होता कि बच्चा बात मानेगा या नहीं।

आज बाल अनुशासन के रूप में  शारीरिक दंड का उपयोग कौन करता है?

 यह जानना मुश्किल है कि वास्तव में कितने प्रतिशत माता-पिता या घर के अन्य सदस्य बच्चों को अनुशासित रखने के लिए शारीरिक दंड का उपयोग करते हैं परंतु फिर भी एक सूची जिसके अनुसार वह लोग जो कभी-कभार  बच्चों पर हाथ उठा ही देते होंगे:

  1. पुरानी पीढ़ी कैसे लोग जिनके बच्चे मार खाकर अनुशासित हो गए उन्हें लगता है कि बच्चों को मारना  ठीक है और इससे बच्चों को कोई नुकसान नहीं होता।
  2. वे सारे माता पिता जिन्हें उनके बचपन में शारीरिक दंड के द्वारा ही अनुशासित किया गया हो उनके अनुसार ऐसा करने पर बच्चे अनुचित कार्यवाही दोबारा नहीं दोहराते। 
  3. ऐसे माता-पिता जिनके बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और उन्हें खतरे से बचाने के लिए बच्चों को आमतौर पर एक थप्पड़ या हल्की मार देना जरूरी होता है। यह माता पिता इंगित करते हैं कि यदि बच्चा किसी खतरे में हो तो उसे रोकना बहुत जरूरी होता है इसके लिए मारना एक तुरंत किया गया उपाय होता है इसका एक उदाहरण वह माता-पिता है जो अपने बच्चे को आंख में हाथ डालने से रोकने के लिए हाथ पर जोर से मारते हैं और समझाते हैं कि आग में हाथ डालने पर इससे भी ज्यादा दर्द होगा।
  4. माता पिता  या कोई वयस्क अपने आउट ऑफ कंट्रोल बच्चे को तब भी मार देते हैं जब किसी और ने विधि का प्रयोग करने के बाद भी बच्चा जानबूझकर अपना व्यवहार दोहराता है। उदाहरण के लिए यदि एक बच्चा किसी मॉल या दुकान में जाकर वहां रखा सामान उठाकर जमीन पर आ सकता है और मना करने के बाद भी यही व्यवहार दौर आता है तो  सब को हो रही असुविधा को देखते हुए देखभाल करता या माता-पिता उसे मार देते हैं। 

बच्चों को शारीरिक दंड देकर अनुशासित करना सही है या गलत यह तब तक नहीं  तय किया जा पाएगा जब तक सोच दो वर्गों में बैठी रहेगी

 आज या समाज कहते हैं कि उन्हें अनुशासन के लिए शारीरिक दंड की आवश्यकता नहीं होती मगर फिर भी  यदि जीवन में उन्होंने कम से कम एक बार शारीरिक दंड की मदद से ही अपने बच्चे को अनुशासित किया है तो यह कहना मुश्किल है कि कब बच्चों बिना शारीरिक दंड के अनुशासित रखने की एक सोच समाज में स्थापित होगी

अभी भी देर नहीं हुए और  सभी धीरे-धीरे वैकल्पिक तरीकों को अपनाना शुरू कर सकते हैं

 जानिए अपने बच्चों को अनुशासन में लाने के  ऐसे आठ वैकल्पिक तरीके जब शारीरिक दंड देना आवश्यक नहीं है

जानिए परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन!


Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

शारीरिक सजा के बिनाअनुशासन के 8 वैकल्पिक तरीके

शारीरिक सजा इस देश में एक समस्या है।

शारीरिक दंड इस देश में एक समस्या है। जानिए अपने बच्चों को अनुशासन में लाने के  ऐसे आठ वैकल्पिक तरीके जब शारीरिक दंड देना आवश्यक नहीं है

किसी को अपने पति या पत्नी या किसी अजनबी को मारने की अनुमति नहीं है।  फिर क्यों दुनिया में एक छोटे और खुद से भी ज्यादा कमजोर बच्चे को मारने की अनुमति दी जानी चाहिए?  

अध्ययनों से पता चलता है कि जो बच्चे बचपन में आक्रामक  तरीकों से अनुशासित किए जाते हैं वे बड़े होकर अपने बच्चों और जीवन साथी  के साथ भी इसी तरह का दुर्व्यवहार करते हैं। वे विवादों से निपटने के के लिए हिंसक तरीकों का प्रयोग करना सीखते हैं।   

यदि बच्चे को मारना गलत नहीं है, तो कुछ भी गलत नहीं है। 

शारीरिक सजा सबसे व्यापक रूप से बहस और संवेदनशील पेरेंटिंग विषयों में से एक है। अधिकांश बाल रोग विशेषज्ञ और पेरेंटिंग विशेषज्ञ शारीरिक सजा की सलाह नहीं देते हैं। लेकिन अभी भी दुनिया भर में अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को पालने के लिए शारीरिक सजा के तरीकों का इस्तेमाल दबे छुपे करते हैं। यहां शारीरिक सजा में हम मारना, नोचना, दबोचना, धक्का देना शामिल करेंगे 

क्या एक बच्चे को  शारीरिक सजा देना ठीक है? 

हर माता-पिता के लिए यह एक बड़ा सवाल है। यह सवाल तब उठता है जब यह बच्चे के अनुशासन की बात आती है।

कई माता-पिता के लिए, थप्पड़ मारना बच्चे के व्यवहार को बदलने का सबसे तेज़ और सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।  पर इसका असर अक्सर अल्पकालिक होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि शारीरिक दंड बच्चों के लिए  जीवन में दीर्घकालिक दुष्परिणाम  छोड़ जाते हैं।

 यदि आप अपने बच्चे को अनुशासित करने के लिए शारीरिक सजा छोड़कर कोई भी दूसरा विकल्प खोज रहे हैं तो आप  इन 8 तरीकों का प्रयोग कर सकते हैं

 आइए जाने वह तरीके जिनके द्वारा बिना मारे आप बच्चों को अनुशासित कर सकते हैं: 

🙂टाइम-आउट – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

 बच्चों को अनुशासित करने के लिए या उनके दुर्व्यवहार को रोकने के लिए माता-पिता उन्हें  खुद ही मरते हैं। ऐसे में जब वे बच्चे को उसकी बहन को मारने से मना करते हैं तब यह बात बच्चा समझ नहीं पाता की मारना गलत क्यों है।

 ऐसे में टाइम आउट का  उपयोग एक बेहतर विकल्प है। टाइम आउट में आप कुछ समय तक बच्चे के साथ बातचीत बंद करते  है और उसे यह बताया जाता है कि जब तक बच्चा अपना व्यवहार ना सुधार ले बातचीत दोबारा चालू नहीं होगी

 लेकिन यह तरीका तभी प्रभावी हो सकता है जब माता पिता अपने बच्चे के साथ सकारात्मक समय बिताते हैं।

  यदि माता-पिता सामान्यता ही बच्चे के साथ बातचीत का समय नहीं निकाल पा रहे तो टाइम आउट का तरीका काम नहीं आएगा। यदि  इस तरीके का ठीक से उपयोग किया जाए, तो बच्चा खुद को शांत करना सीख जाएगा, जो एक उपयोगी जीवन कौशल है।

🙂चयनात्मक अनदेखी – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

जब बच्चा आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए दुर्व्यवहार कर रहा होता है तब आप उसकी अनदेखी करें। चयनात्मक अनदेखी वास्तव में शारीरिक सजा की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है।  इसका मतलब यह नहीं कि आपका बच्चा कुछ खतरनाक या अनुचित कर रहा है और आप जानकर भी उसकी तरफ नहीं देख रहे। 

इसका मतलब है कि उनकी गतिविधियों पर ध्यान न दें जब आपका बच्चा रोना, जमीन में लौटना या शिकायत करके ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करता है।  रोना, चीजें फेंकना, जमीन में लोटना यह कुछ ऐसे उदाहरण है जो व्यवहार बच्चा माता-पिता का ध्यान आकर्षित करने के लिए करता है।

 इस तरह के व्यवहारों पर कोई प्रतिक्रिया ना करें।

फिर, जब वह अच्छी तरह से पूछता है या वह व्यवहार करता है, तो अपना ध्यान उस पर लौटाएं। समय के साथ, वह सीखेगा कि विनम्र व्यवहार आपका ध्यान पाने का सबसे अच्छा तरीका है।  

 🙂सुविधा ले लो – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

हालांकि   मार 1 या 2 मिनट के लिए असर  करती है परंतु सुविधा छूट जाने का असर ज्यादा लंबा होता है। बच्चे को यह बताएं की  उसके किसी व्यवहार के कारण उससे कुछ सुविधाएं वापस ली जा रही है।

 दिनभर के लिए टीवी, वीडियो गेम, उसका पसंदीदा खिलौना या घर में साथ की जाने वाली कोई एक मजेदार गतिविधि करने की अनुमति नहीं दी जाएगीI बच्चा धीरे से  उन गलतियों को नहीं दोहराएगा जिससे उसकी सुविधाएं ले ली जाते हैं।

स्पष्ट करें कि विशेषाधिकार कब वापस अर्जित किए जा सकते हैं। आमतौर पर, 24 घंटे का समय आपके बच्चे को उसकी गलती से सीखने के लिए काफी लंबा होता है। 

🙂नया कौशल सिखाएं – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

शारीरिक सजा के साथ एक मुख्य समस्या यह है कि यह आपके बच्चे को बेहतर व्यवहार करने का तरीका नहीं सिखाती है। जब बच्चा जिद कर रहा था तब  आपने बच्चे की पिटाई कर दी, कुछ समय के लिए वह डर के मारे चुप हो गया।

 परंतु आपने बच्चे को यह नहीं सिखाया की अगली बार जब वह किसी कारण से परेशान हो तो वह खुद को कैसे शांत कर सकता है।

बच्चे को अनुशासित करने के लिए नए और सकारात्मक तरीकों का प्रयोग करें,  दंडात्मक तरीकों का नहीं।  उसे सिखाएं कि वह अपनी समस्या का कैसे हल निकाल सकता है। किस तरह उसे अपनी भावनाओं पर पकड़ बनानी होगी। और किस तरह कभी-कभी समझौता करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 

🙂तार्किक परिणाम  बताएं – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

जब बच्चा अपनी चीजों को व्यवस्थित सही जगह पर वापस नहीं रखता तब आप  बच्चे का सामान मत संभालिए।  उन्हें बताइए यदि आज   बच्चा सामान को निश्चित जगह पर नहीं रखेंगे तो कल उसे खोजने में उन्हें ही दिक्कत होगी । बच्चे के सोने के बाद आप  बच्चे का सामान कहीं और रख दें।

अगली बार  बच्चे को अपना सामान खुद ही खोजने  दे, सामान आसानी से नहीं मिलने पर बच्चा यह समझ पाएगा कि चीजों को संभाल कर रखना क्यों आवश्यक है। 

परिणाम को व्यवहार की समस्या से सीधे जोड़ने से बच्चों को यह देखने में मदद मिलती है कि यह प्रत्यक्ष परिणाम उनके ही द्वारा लिए गए निर्णय के फल स्वरुप हैं। 

🙂प्राकृतिक परिणामों की अनुमति दे – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

प्राकृतिक परिणाम बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने का मौका देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा कहता है कि वह जैकेट  नहीं पहनना चाहता तो आप उसे वैसे ही खेलने जाने दे, उसे बाहर जाकर जब ठंड लगेगी तब वह खुद समझ जाएंगे कि जैकेट पहनने क्यों कहा गया था।

इस तरीके का प्रयोग  करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा किसी वास्तविक खतरे में तो नहीं है।

 प्राकृतिक परिणामों का उपयोग  तब करें जब आपको लगता है कि आपका बच्चा अपनी गलतियों से सीखे।आप इस तरीके का उपयोग तब नहीं कर सकते जब उसके परिणाम स्वरूप बच्चे को चोट लग सकती या कोई बड़ी हानि हो सकती।  उदाहरण के लिए-  यदि बच्चा चाकू का प्रयोग कर रहा है तो आप यह कहकर नहीं छोड़ सकते कि बच्चा हाथ कटने पर खुद ही सीख जाएगा 

🙂अच्छे व्यवहार के लिए पुरस्कृत करें – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

बच्चे को गलत व्यवहार के लिए दंडित करने की बजाय अच्छे व्यवहार के लिए पुरस्कृत करें। उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा अक्सर अपने भाई-बहनों के साथ लड़ता है तो यदि वह किसी समय अपने भाई बहनों की मदद करता है तो आप उस व्यवहार के लिए  अपने बच्चे को पुरस्कृत करें। 

 अच्छा व्यवहार करने पर एक प्रोत्साहन मिलने से  दुर्व्यवहार में तेजी से बदलाव आ सकता है।

पुरस्कार बच्चों को इस बात पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं कि उन्हें विशेषाधिकारों को अर्जित करने के लिए क्या करना चाहिए, बजाय इसके कि  उनको बुरे व्यवहार पर सजा दी जाएगी।

🙂बस बुराई ना खोजें – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

 बच्चे की उपस्थिति में किसी और के सामने अपने बच्चे की शिकायत ना करें।  इससे ना आपकी समस्या हल होगी और ना ही बच्चे का व्यवहार सुधरेगा ।अपितु बच्चे को सबके सामने हीन महसूस होगा।

 वह यह सोचने लगेगा कि यह  व्यवहार ही मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा है।

 जब कमरे में कई बच्चे होते हैं, तो उन बच्चों पर सबसे अधिक ध्यान दें और प्रशंसा करें जो नियमों का पालन कर रहे हैं और अच्छा व्यवहार कर रहे हैं। ऐसे में जाकर अपने बच्चे को यह ना बताएं कि देखो बस तुम ही अनुशासित नहीं हो ।  इसके बदले  उसे दिखाएं की अनुशासित रहने पर प्रशंसा  प्राकृतिक रूप से होगी ही।

हर माता-पिता अपने बच्चे को अनुशासित रखना और देखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि बच्चा उनकी उम्मीदों के हिसाब से ही चले।  बच्चों को अनुशासित रखना ठीक है परंतु उन्हें कुछ चीजें उनके हिसाब से भी करने दी जा सकती हैं। जब तक उनके किए गए कामों का कोई दुष्परिणाम नहीं हो रहा हो।  उदाहरण के लिए – यदि कोई बच्चा हर दिन अपना सामान संभाल कर रखता है। और किसी एक दिन अपने दोस्तों के साथ खेलने जाने की जल्दी में  वह अपना सामान नहीं संभाल पाता तो इसे अनुशासनहीनता ना समझे।

 हर अभिभावक  को अपने बच्चे को समझने का प्रयास भी करना चाहिए।

  बच्चा या  उससे संबंधित समस्याएं हर सुबह चाय के साथ उपभोग की जाने वाली बिस्किट नहीं है । इसका अभिप्राय यह है कि आप हर दिन बस अपने बच्चे की गलतियां  ही ना निकालते रहे।

कभी उनके साथ बैठकर उन्हें समस्याओं का हल निकालना भी सिखाए ।  हर बच्चा एक इंसान है, जिसके व्यक्तित्व का सम्मान करना हर माता-पिता के लिए भी जरूरी है।

जानिए परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन!

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

प्ले स्कूल में बच्चे क्या सीखते हैं/सीखेंगे?

प्ले स्कूल-क्या सीखते हैं? आधुनिक जीवनशैली में जब बच्चा 2साल का हो जाता है, तो  स्वाभाविक रूप से कुछ प्रश्न माता व पिता के दिमाग में आते है:

  • बच्चे को किस प्ले स्कूल या प्राइमरी स्कूल में डाले?
  • कब डालें?
  • प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?
प्ले स्कूल-क्या सीखते हैं? आधुनिक जीवनशैली में जब बच्चा 2साल का हो जाता है, तो  स्वाभाविक रूप से कुछ प्रश्न माता व पिता के दिमाग में आते है, जैसे कि बच्चे को किस प्ले स्कूल या प्राइमरी स्कूल में डाले, कब डालें, प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?
Photo from: pexels.com

 यदि आप भी उन अभिभावकों में से एक हैं, जिन्हें अपने बच्चे को एक प्ले स्कूल में भेजने या ना भेजने के बीच निर्णय लेना है, तो उन्हें पहले प्ले स्कूल की शैक्षणिक दिनचर्या को मोटे तौर पर समझना  चाहिए।

प्ले स्कूल-क्या सीखते हैं:

प्ले स्कूल एक अनौपचारिक शैक्षणिक स्थल है

 आप मान सकते हैं कि प्ले स्कूल एक अनौपचारिक शैक्षणिक स्थल है,

जहां बच्चों को औपचारिक शिक्षा से पूर्व स्वयं और आसपास के जीवन का अवलोकन करना व उनसे सामंजस करना सिखाया जाता है।

प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?

इस प्रकार प्ले स्कूल बच्चों को समझ हासिल करने में सक्षम बनाता है।

गणित का प्रारंभिक ज्ञान

 बच्चों को गणित का प्रारंभिक ज्ञान भी यहां दिया जाता है, गणित के बेसिक समझ को बच्चों तक पहुंचाने के लिए विशेष रूप से बनाई गई, आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

बच्चे को ठोस, हेरफेर करने वाले शब्दों के माध्यम से गणित का परिचय दिया जाता है, जो, उसे बुनियादी अवधारणाओं को समझने में सक्षम बनाता है। 

जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ती है, वह विशेष रूप से डिज़ाइन की गई सामग्रियों का उपयोग करके जोड़, घटाव, गुणा और भाग के साथ काम करना शुरू कर देता है।

भाषा का ज्ञान

 भाषा का ज्ञान इस कार्यक्रम के  बुनियादी कौशल में शामिल है। इसकी शुरुआत,

  • सुनकर खेले जाने वाले खेल,
  • पहेलियां और अक्षरों को उंगलियों से बनाना सिखा कर, किया जाता है।
  • विशेष रूप से  डिजाइन की गई शिक्षा सामग्री बच्चों को यह समझने में सक्षम बनाती है, की अलग-अलग ध्वनियों को एक साथ कैसे जोड़ कर, हम, शब्द बना सकते हैं।

 यह क्षेत्र मौखिक भाषा,भाषा के विकास, लिखित, अभिव्यक्ति, पढ़ने और व्याकरण में पकड़ मजबूत बनाने में मदद करता है।

प्रैक्टिकल लाइफ बच्चों को टास्क  प्रबंधन

 प्रैक्टिकल लाइफ बच्चों को टास्क  प्रबंधन सिखाती है, जैसे कि

  • खुद से ठिफिन खोलकर उसमें से खाना निकालकर खाना,
  • पानी पीने के लिए बॉटल का प्रयोग करना,
  • मोजे व शूज पहनना, रुमाल रखना,
  • खुद को स्वक्छ व व्यवस्थित रखना,
  • अपने सहपाठियों, माता पिता व बुजुर्गजनों से सद्व्यवहार आचरण करना व
  • समाज के प्रति जिम्मेदार होना।

प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?

 इस प्रकार प्ले स्कूल का क्षेत्र भविष्य में  मिलने वाली औपचारिक शिक्षा का मजबूत आधार है, बच्चों को किसी भी कार्य की शुरुआत, मध्य  और अंत के बीच अंतर का ज्ञान होता है।

बच्चों में स्वयं की देखभाल, आदेश का पालन, मांसपेशियों का समन्वय, पर्यावरण की देखभाल और सामाजिक संबंधों को समझने में सहायता व विकास करने में मदद करता है।

बच्चों में अपने कार्यों को खुद कर पाने का कॉन्फिडेंस/विश्वास बढ़ता है।

क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है? पहले इन कुछ बिंदुओं पर विचार जरूर करें   क्या आपको अपने बच्चे को प्ले स्कूल भेजना चाहिए?

इस अद्भुत यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। 

यदि यह सुझाव आपको अपना उत्तर खोजने में मदद करते हैं तो कृपया पोस्ट को लाइक करें और कमेंट करें

 यदि परवरिश शैली से संबंधित आपका कोई और प्रश्न है तो उसे भी कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की 9 टिप्स

अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की 9 टिप्स

माता पिता का बच्चों के साथ बिताया समय ऐसा होना चाहिए वो सही मायनों में बच्चों को दिया गया विशेष समय हो।

 यहां व्यस्त परिवारों के लिए नौ सुझाव दिए गए हैं:
माता पिता का बच्चों के साथ बिताया समय ऐसा होना चाहिए वो सही मायनों में बच्चों को दिया गया विशेष समय हो।
 यहां व्यस्त परिवारों के लिए नौ सुझाव दिए गए हैं:
Photo by Daria Obymaha from Pexels

अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय (क्वालिटी टाइम) व्यतीत नहीं कर पा रहे हैं?

आज हर व्यक्ति का जीवन बहुत व्यस्त है और काम और जीवन की जिम्मेदारियों के बीच, दिन पलक झपकते ही बीत जाते हैं। इससे बीच माता-पिता को ये चिंता सताती कि वे अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय (क्वालिटी टाइम) व्यतीत नहीं कर पा रहे हैं। 

उन्हें चिंता रहती है कि इससे बच्चों के विकास में देरी हो सकती है।

ऐसे में जब आप घर में रहने वाले माता-पिता का एक सोशल मीडिया पोस्ट देखते हैं।

 जिसमें वे अपने बच्चों को पढ़ा रहे है, उनके साथ चित्रकारी कर रहे है या स्थानीय चिड़ियाघर ले जा रहें हैं, तो आपकी चिंता और बढ़ जाती है।

आप निराश ना हों! हाल के अध्ययनों से पता चला है कि समय की मात्रा की तुलना में गुणवत्ता से समय बिताना अधिक महत्वपूर्ण है। 

यहां हम बच्चों को कम समय देने की या उनका समय काटने की बात नहीं कर रहे हैं। बच्चों को माता-पिता और देखभाल करने वालों के साथ उच्च-गुणवत्ता वाला समय चाहिए। 

माता-पिता के साथ बिताया गया गुणवत्ता का समय बच्चों के लिए अधिक फायदेमंद होता है। और यह अनुभव बड़े होने पर उन पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। 

माता पिता का बच्चों के साथ बिताया समय ऐसा होना चाहिए वो सही मायनों में बच्चों को दिया गया विशेष समय हो।

 यहां व्यस्त परिवारों के लिए नौ सुझाव दिए गए हैं:

1. “हमारा” समय

     अपने बच्चे के साथ दैनिक रूप से बैठिए। आप इससे “हमारा” समय कह कर भी संभोधित कर सकते है। और यदि ऐसा करना संभव ना हो तो अन्य तरीकों को अपनी दिनचर्या में जोड़ें।

जैसे कि आपके बच्चे के लंच बॉक्स में एक नोट छोड़ना या घर के व्हाइटबोर्ड पर कुछ अच्छा लिखना।

2. दैनिक कार्य

     आप और आपके बच्चे के लिए एक विशेष कार्य निश्चित करें जो आप रोज करें।

उदाहरण के लिए, सोने से पहले बच्चे की रुचि की कोई किताब उसके साथ पढ़ें।

3. प्यार का महत्व

     अपने बच्चे को बताएं कि आप हर दिन उससे प्यार करते हैं।

और उसे बताएं कि वह आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है और वह आपको कैसा महसूस कराता है।

4. प्रशंसा करें

     उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा आपके कहे बिना ही कुछ अच्छा करे तो उसकी प्रशंसा जरूर करें।

4. साथ खाएं

     जब भी संभव हो अपने बच्चों के साथ भोजन बनाएं और खाएं। यदि समय सीमित है, तो साधारण कुछ ऐसा बनाए जो आसान है और जिसमें बहुत कम तैयारी की आवश्यकता हो।

सेब जैसे स्वस्थ स्नैक कहते हुए भी आप बच्चों से दिन भर की बातें कर सकते हैं।

6. “आप चुनें” 

     अपने बच्चे को उपयोग में आने वाला चीज़ों का चयन करने दें।

फिर यदि आपको लगे कुछ अनुचित खरीदा जा रहा है, तो उसके बारे में बच्चे को कारण सहित स्पष्टीकरण दें।  

7. अपने बच्चे के साथ खेलें

     अपने बच्चे के साथ खेलें। बच्चे के साथ बिताया गया हर समय उससे व्यक्तित्व विकास को सकारातमकता प्रदान करेगा।

8. मूर्ख बनो

     उनके प्रश्नों के उत्तर में कभी कभी आप मूर्ख बने रहें। या उनसे प्रश्न पूछें।

9. ध्यान भटकने वाली चीजें थोड़ी देर दूर रखें।

     जब आप अपने बच्चे के साथ समय बिताते हैं तो बाकी सब बंद कर दें।

फोन, आ ई पेड,, सोशल मीडिया या टेलीविजन ना देखें।

अपने बच्चे के साथ अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपको उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताने की जरूरत है। 

माता-पिता अपने बच्चे के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अद्भुत यात्रा में हम सब साथ हैं।
read: What should be a parent’s role in child’s life?

यदि ये सुझाव आपको अपना उत्तर खोजने में मदद करते हैं, तो कृपया टिप्पणी करें।

यदि आप पेरेंटिंग से संबंधित कोई अन्य प्रश्न पूछना हैं, तो आप टिप्पणी भी कर सकते हैं।

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है?

 क्या आपको अपने बच्चे को प्ले स्कूल में भेजना चाहिए? 

क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है?  इसका निर्णय लेने से पहले आपको कुछ विचार  करना चाहिए
क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है? इसका निर्णय लेने से पहले आपको कुछ विचार  करना चाहिए

 इसका निर्णय लेने से पहले आपको कुछ विचार  करना चाहिए

 कुछ दशक पहले भारत में प्ले स्कूलों की आवश्यकता अनसुनी थी 

 बहुत कम लोग अपने बच्चों का प्ले स्कूल में दाखिला कराते थे,

फिर भी हर कोई परिपक्व, समझदार पढ़ा लिखा और और भाषा का जानकार होता था

अब हालांकि ऐसा लगता है जैसे हर माता-पिता अपने बच्चे को प्री नर्सरी या प्लेस्कूल में भेज देते हैं

 भारत में अधिकांश प्ले स्कूल निजी है

 यदि आप भी उनमें से एक है जो अपने बच्चे को प्ले स्कूल या प्री नर्सरी में भेजना चाहते हैं तो पहले इन कुछ बिंदुओं पर विचार जरूर करें 

समय

 क्या आपके पास अपने बच्चे के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय है? 

प्ले स्कूल में जाकर बच्चों को दूसरे बच्चों के साथ बैठने और स्कूल के वातावरण की आदत पड़ जाती है ऐसे में औपचारिक शिक्षा के लिए स्कूलों में भर्ती होने पर उन्हें कम परेशानी होती है 

 यदि आप और आपके जीवनसाथी दोनों काम के लिए घर से बाहर रहते हैं और आपके पास अधिक समय नहीं है, तो आप अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए समय नहीं दे पाएंगे

इस अवस्था में आप अपने बच्चे को प्लेस्कूल में भर्ती करवा सकते हैं

 हालांकि अगर माता या पिता में से कोई एक घर पर रुकता है एवं अपने बच्चे को पढ़ाने का समय निकाल सकता है तो आपको अपने बच्चे को प्लेस्कूल में भर्ती करवाना  अनिवार्य नहीं है

 याद रखें बहुत छोटे बच्चों में सीखने की अद्भुत क्षमता होती है

उनका दिमाग बहुत तेज होता है, अनुकूल वातावरण मिलने पर बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं

 शैक्षणिक दिनचर्या

 अपने बच्चे को प्ले स्कूल में डालने से पहले  प्लेस्कूल के बारे में कुछ जानकारी हासिल करें कोई ऐसा स्कूल खोजें जहां  बच्चों को सिखाने के लिए खेलकूद के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है 

जहां आपके बच्चे को नई चीजें सीखने के लिए संघर्ष न करना  हो

सामाजिक अवसर

 प्ले स्कूल बच्चों को अन्य बच्चों के साथ मिलजुल कर रहने का अवसर प्रदान करते हैं

इसके अलावा वहां धीरे-धीरे एक अनौपचारिक तरीके से अभ्यास कराया जाता है जिससे बच्चों को औपचारिक स्कूल में भर्ती होने पर परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता

इसलिए यदि आप एक अलग-थलग पड़ोस में रहते हैं या ऐसी जगह पर जहां आपके बच्चे के उम्र के कई बच्चे नहीं है तो आप जरूर अपने बच्चे को एक प्लेस्कूल में भेजने का तय कर सकते हैं

 आपका बच्चा छोटी उम्र में कई बच्चों के साथ बातचीत करना सीखेगा 

अपने बच्चे को प्ले स्कूल भेजने के सामाजिक लाभ ले, लेकिन चमत्कार की उम्मीद ना करें

 यदि आपका बच्चा शर्मिला है तो उसे प्लेस्कूल में  भेजने मात्र से वह आत्म विश्वासी व्यक्ति नहीं बन जाएगा

अपने बच्चे के आत्मविश्वास का विकास करने के लिए आपके पास अन्य तरीके भी हैं,

यदि आपके आसपास कोई स्थानीय क्लब है  तो आप अपने बच्चे का वहां खेल में दाखिला करवा सकते हैं

दिनचर्या

 प्ले स्कूल में भेजने से आपके बच्चे की एक दिनचर्या बन जात हैं 

 हालांकि यह भी याद रखें कि जो बच्चे प्लेस्कूल में नहीं जाते वह भी 12 से 14 साल स्कूल और कॉलेज में जाकर एक दिनचर्या के आदी हो जाते हैं

 उनका व्यक्तित् उनकी सोचऔर उनके द्वारा उठाए गए कार्य पर निर्भर करता है, ना की  इस बात पर की उन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा प्लेस्कूल से की है या नहीं

Read in English: Is Playschool Education Necessary?

Related topic: Happy Childhood, let me put it differently

इस अद्भुत यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। 

यदि यह सुझाव आपको अपना उत्तर खोजने में मदद करते हैं तो कृपया पोस्ट को लाइक करें और कमेंट करें

 यदि परवरिश शैली से संबंधित आपका कोई और प्रश्न है तो उसे भी कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

गृह कार्य का उद्देश्य क्या है?

क्या आपको लगता है आपके बच्चे को गृह कार्य करने में परेशानी हो रही है?  यदि हां तो जाने की गृह कार्य देने का उद्देश्य क्या होता है- 

क्या आपको लगता है आपके बच्चे को गृह कार्य करने में परेशानी हो रही है?  यदि हां तो जाने की गृह कार्य देने का उद्देश्य क्या होता है-
गृह कार्य होमवर्क क्यों दिया जाता है?

होमवर्क या गृह कार्य क्यों दिया जाता है?

गृह कार्य देना या ना देना स्कूल या शिक्षक या अन्य किसी स्थानीय दृष्टिकोण पर आधारित होता है 

 कुछ शिक्षक  दूसरी कक्षा तक बच्चों को होमवर्क नहीं देते हैं

जबकि कुछ किंडर गार्डन में गृह कार्य देना आरंभ करते हैं

 कुछ शिक्षक होमवर्क बनाते हैं जबकि अन्य पहले से तैयार वर्कशीट का  उपयोग करते हैं

अभिभावक अपने बच्चों का गृह कार्य ना करें

 अधिकांश शिक्षक गृह कार्य का उपयोग यह जानने के लिए करते है कि बच्चा क्या और कितना जानता है

  वे नहीं चाहते कि माता-पिता अपने बच्चों का होमवर्क करें

शिक्षक अभिभावकों से आशा रखते हैं कि अभिभावक सुनिश्चित करें कि होमवर्क पूरा हो गया है

यदि  अभिभावकों को कोई गलती नजर आए तो वे उसकी समीक्षा करें 

अपने बच्चों का प्रयोजन कार्य / प्रोजेक्ट ना करें

 शिक्षक नहीं चाहते कि माता-पिता अपने बच्चों का प्रयोजन कार्य/ प्रोजेक्ट बनाएं

 अपितु वे चाहते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों का मार्गदर्शन करें और प्रोजेक्ट में लगने वाली आवश्यक वस्तुओं का प्रबंध करें

आप चाहे तो इसके बारे में शिक्षक से जानकारी लेकर अपने बच्चे के साथ इसकी समीक्षा करें

गृह कार्य एवं रोज की पढ़ाई करने के लिए घर का कोई एक स्थान निश्चित करें

 सभी बच्चों को एक ही चीज की जरूरत होती है और वह है एक साफ-सुथरी जगह

 लेकिन ध्यान रखें कि प्रत्येक बच्चा अलग तरीके से काम करता है

 कुछ अपना काम रसोई की मेज पर तो कुछ अपने कमरे की डेस्क पर करना पसंद करते हैं

स्वभाव को देखते हुए उसके बैठक की जगह और समय सुनिश्चित करें

 कुछ बच्चे स्कूल के ठीक बाद होमवर्क करना पसंद करते हैं

दूसरों को एक लंबे समय के ब्रेक की आवश्यकता होती है

कुछ बच्चों को  शाम को कुछ नाश्ता करने के बाद होमवर्क करना पसंद आता है

 यदि आपका बच्चा स्कूल से आने के बाद अन्य किसी  क्लासेस के लिए जाता है तो होमवर्क करने का कोई एक समय निर्धारित कर ले

 आप जो भी दिनचर्या चुनते हैं अपने बच्चे को उसके अनुसार कार्य करने में  मार्गदर्शन करें

जाने कि आपका बच्चा  कैसे सबसे अच्छा अध्ययन करता है

उदाहरण के लिए, 

  • कुछ बच्चे शब्दों को वर्तनी लिखकर 
  •  दूसरे उसे आंखें बंद करके और उन्हें चित्रित करके उन्हें जोर से कहते हुए सीखेंगे 
  • बच्चों को अध्ययन के लिए एक अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है
  •  कुछ बच्चे  संगीत सुनना चाहते हैं
  • कुछ को और के बीच में ही रह कर पढ़ने से मदद मिलती है 

 बच्चों को अनुकूल वातावरण चाहिए

 अपने बच्चे के व्यक्तित्व के अनुसार आप उन्हें घर का वातावरण  दे

अपने बच्चे के साथ है, मगर आसपास मंडे राय नहीं

 यह ध्यान रखें कि यह उनका कार्य है, आपका नहीं

आप उनके लिए तब उपलब्ध रहें जब उन्हें आपकी जरूरत हो

  एक्सपर्ट्स के अनुसार

एक आदर्श सेटअप में माता पिता अपना काम करते रहेंगे और बच्चा पास ही बैठा अपना ग्रह कार्य कर रहा होगा

लेकिन यह हमेशा संभव नहीं है

कई बार माता-पिता के पास अपने काम होते हैं

 उन्हें काम के सिलसिले में  घर से बाहर जाना पड़ता है या फिर मां को खाना पकाने के लिए रसोई में रहना होता है

यदि आप घर पर हैं तो अपने बच्चे को बताएं कि आप सहायता के लिए उपलब्ध है पर आप साथ में अपना भी काम कर रहे हैं

 यदि आप घर पर उपलब्ध नहीं है तो सुनिश्चित करें की एक विश्वसनीय वयस्क वहां हो जो कि आवश्यकता पड़ने पर बच्चे को होमवर्क में मार्गदर्शन दे सके

 यह भी याद रखें कि हर होमवर्क एक समान नहीं होता  इसलिए हर चीज पर आपके ध्यान की आवश्यकता नहीं होती

 मीडिया एक्स्पोज़र को सीमित  करें

जब आपका बच्चा होमवर्क करता है तो टीवी बंद कर दें। जब तक किसी जानकारी के लिए कंप्यूटर की आवश्यकता ना हो उसे भी बंद रखें

  बच्चे के होमवर्क शुरू करने से पहले आप उससे पूछ सकते हैं कि उसे अपना कार्य करने में कितना समय लगेगा

 याद रखें यदि कमरे में आप टीवी देख रहे हैं तो आपके बच्चे का ध्यान गृह कार्य में नहीं लगेगा

शिक्षक को बताएं कि आपने अपने बच्चे के गृह कार्य में उसकी कितनी मदद की है

यदि आपके बच्चे को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है या वास्तव में कुछ समझ में नहीं आया है तो शिक्षक को बताएं 

शिक्षक को सूचना देने के लिए आप निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं

  •  असाइनमेंट पर लिखें की कार्य अभिभावक की मदद से किया गया है  
  • डायरी में लिखे या अलग से नोट कॉपी में लगा दे 

शिक्षकों द्वारा होमवर्क करने के कई उद्देश्य हो सकते हैं

  • जिसमें अभ्यास करवाना या
  • देखना कि बच्चा कितना सीख चुका है
  • उसे किन  विषयों में मदद की आवश्यकता है मूलभूत कारण होते हैं

इस अद्भुत यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। 

यदि यह सुझाव आपको अपना उत्तर खोजने में मदद करते हैं तो कृपया पोस्ट को लाइक करें और कमेंट करें

 यदि प्रिंटिंग से संबंधित आपका कोई और प्रश्न है तो उसे भी कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं

To read in English: What the point of homework?

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

बच्चे अपने जीवन में खिलौने* क्यों पसंद करते हैं?

बच्चे अपने जीवन में खिलौने क्यों पसंद करते हैं? यह उसी कारण से है जिस कारण हम वयस्क हमारे मनोरंजन के लिए चीजें चाहते हैं। खिलौने बच्चों और वयस्कों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम कार, बाइक, बेस्ट गैजेट, बेस्ट ड्रेस आदि रखना चाहते हैं। बच्चों के लिए यह जगह उनके खिलौनों से भर जाती है। एक बच्चे को अलग-अलग उम्र में अलग-अलग खिलौने पसंद आ सकते हैं।

खिलौने*? बच्चे अपने जीवन में खिलौने* क्यों पसंद करते हैं? यह उसी कारण से है जिस कारण हम वयस्क हमारे मनोरंजन के लिए चीजें चाहते हैं।

To read this article in english: Why do children like to have toys in their life?

खिलौने* बच्चों और वयस्कों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हम कार, बाइक, बेस्ट गैजेट, बेस्ट ड्रेस आदि रखना चाहते हैं।

बच्चों के लिए यह जगह उनके खिलौनों से भर जाती है।

एक बच्चे को अलग-अलग उम्र में अलग-अलग खिलौने पसंद आ सकते हैं।

जानिए कुछ ऐसे खिलौने* जो हर उम्र के पसंद आते हैं।

जानिए कुछ ऐसे खेल, जो किसी भी उम्र में पसंदीदा हैं:

कैरम:

कैरम (स्पेल्ड कैरम) भी दक्षिण एशियाई मूल का खेल आधारित प्रचलित है।

यह खेल भारत, बांग्लादेश, अफग़ानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, अरब देशों और आसपास के क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है, और विभिन्न भाषाओं में विभिन्न नामों से जाना जाता है।

दक्षिण एशिया में, कई क्लब और कैफे नियमित टूर्नामेंट आयोजित करते हैं। कैरम आमतौर पर बच्चों और सामाजिक स्तर में परिवारों द्वारा खेला जाता है।

शतरंज:

शतरंज एक दो-खिलाड़ी वाला खेल है जो एक बिसात पर खेला जाता है जिसमें 64 वर्गों को 8 × 8 ग्रिड में व्यवस्थित किया जाता है।

यह खेल दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा खेला जाता है। माना जाता है कि शतरंज 7 वीं शताब्दी से कुछ समय पहले भारतीय खेल चतुरंग से लिया गया था।

चतुरंगा पूर्वी रणनीति के खेल xiangqi, janggi, और शोगी का संभावित जनक भी हैं।

 लेगो:

लेगो का इतिहास लगभग 100 वर्षों का है, जिसकी शुरुआत 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में लकड़ी के छोटे-छोटे नट बनाने से हुई थी।

डेनमार्क में प्लास्टिक लेगो ईंटों का निर्माण 1947 में शुरू हुआ।

 लूडो:

लूडो दो से चार खिलाड़ियों के लिए एक रणनीति बोर्ड गेम है, जिसमें खिलाड़ी एक ही डाई के रोल के अनुसार चार टोकन शुरू से अंत तक दौड़ते हैं।

अन्य क्रॉस और सर्कल गेम्स की तरह, लूडो भारतीय खेल पचीसी से लिया गया है, लेकिन यह सरल है।

खेल और इसकी विविधताएं कई देशों में कई और नामों से लोकप्रिय हैं।

साँप और सीढ़ी:

साँप और सीढ़ी एक प्राचीन भारतीय बोर्ड खेल है जिसे आज दुनिया भर में क्लासिक माना जाता है।

यह एक गेमबोर्ड पर दो या दो से अधिक खिलाड़ियों के बीच खेला जाता है, जिसमें गिने-चुने वर्ग होते हैं।

बोर्ड पर कई “सीढ़ी” और “सांप” चित्रित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में दो विशिष्ट बोर्ड वर्ग हैं।

खेल सरासर भाग्य पर आधारित एक सरल दौड़ है, और छोटे बच्चों के साथ लोकप्रिय है। 

बच्चे अपने जीवन में खिलौने* क्यों पसंद करते हैं? यह उसी कारण से है जिस कारण हम वयस्क हमारे मनोरंजन के लिए चीजें चाहते हैं।

बच्चे कई कारणों से खिलौनों से जुड़ते हैं:

  • खिलौने बच्चों को सुखद समय और खुश यादों के साथ जोड़ देते हैं।
  • खिलौने जो बच्चे को वास्तविक जीवन की गतिविधियों से जुड़ने या उनकी नकल करने की सुविधा देते हैं, बच्चों को सबसे अच्छे लगते हैं।।
  • यह एक दोस्त के रूप में, बच्चे के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान को भरता है।
  • खिलौने सामाजिक समारोह में भी उन्हें व्यस्त रखते हैं।
  • बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं, अगर उनके पास उनका खिलौना है।
  • आपने देखा होगा कि एक बच्चा नई जगह पर, ऊबने की शिकायत करने लगता है। इस तरह की स्थितियों में, अगर उसके पास अपना खिलौना है, तो यह शिकायत इतनी जल्दी नहीं आ सकती है।
  • खिलौने उनकी कल्पना शक्ति को बढ़ाए हैं और साथ ही उनकी काल्पनिक कहानियों में पत्र बनकर मदद करते हैं।
  • अन्य बच्चों के साथ बातचीत शुरू करने के लिए भी खिलौने* महत्वूर्ण साधन है।

हर उम्र में हर बच्चे के लिए हमेशा एक पसंदीदा खिलौना होता है। बच्चा खिलौने* से जुड़ा हुआ महसूस करता है। कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स में उल्लेख करें आपको कौन सा खेल या खिलौना पसंद है।

खुश रहना हर बच्चे का अधिकार है।

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

खिलौने? क्या बच्चों को खिलौनों से भरा कमरा चाहिए? पुनर्विचार। 

खिलौने? क्या बच्चों को खिलौनों से भरा कमरा चाहिए? पुनर्विचार करें।

इस तरह से मैं हर बार खुद का मूल्यांकन करती हूं

जब मैं एक खिलौने की दुकान से गुजरती हूं

और मेरी बेटी मेरी तरफ बहुत आशा और उत्साह के साथ देखती है।

क्या बच्चों को खिलौनों से भरा कमरा चाहिए? पुनर्विचार करें। इस तरह से मैं हर बार खुद का मूल्यांकन करती हूं, जब मैं एक खिलौने की दुकान से गुजरती हूं और मेरी बेटी मेरी तरफ बहुत आशा और उत्साह के साथ देखती है।

लेकिन भगवान को  धन्यवाद, मेरे बच्चे अब समझते हैं, उन्हें बाजार में देखे जाने वाले प्रत्येक खिलौने* को खरीदने की आवश्यकता नहीं है।

मैं कुछ तरीके साझा करूंगी, यह उन पर दबाव डाले बिना या उन्हें वंचित महसूस किए बिना किया जा सकता है।

To read in English: Do children need a room full of toys? Rethink.

खिलौने की जरूरत का मूल्यांकन:

हम सभी के लिए बच्चों के साथ घूमने के लिए सबसे अच्छी जगह डिज्नी लैंड हो सकती है।

एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक बच्चे के लिए सबसे अच्छी जगह एक खिलौने* की दुकान या एक खेल क्षेत्र हो सकता है।

एक रिसॉर्ट में सबसे अच्छी जगह मैदान हो सकता है।

प्लेस्कूल में सबसे अच्छी जगह खिलौने* के कमरे हो सकते हैं।

लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि एक औपचारिक स्कूल में स्पोर्ट्स रूम, पसंदीदा की सूची में कभी क्यों नहीं आता है?

बस समय में वापस जाओ, और हमें क्या मिलेगा? यह की एक स्कूल में होने वाली पसंदीदा जगहों की सूची में हमेशा शीर्ष पर रहने वाला खेल मैदान ही था।

घर पर खिलौनों के सर्वोत्तम स्रोत:

बच्चों को खिलौने मिलते हैं, उनके परिवार से, दोस्तों से और अब तो मैकडॉनल्ड्स में खाने के साथ भी मिलता है।

वे इन खिलौनों के साथ थोड़ी देर खेलते हैं और फिर यह उनकी अलमारी में जगह घेरता है।

 ऐसा नहीं है कि बच्चे अपने खिलौनों से नहीं खेलते, वे खेलते हैं।

लेकिन वे जल्द ही ऊब जाते हैं।

और एक बार जब बच्चे अपने खिलौनों से ऊब जाते हैं, तो बस इसे अलमारी के बड़े संग्रह में जोड़ देते हैं।

 आपके बच्चे के पास खिलौनों से भरा एक अलमीरा हो सकता है, दो कारणों से:

यह सबसे अच्छा उपहार है जो एक बच्चे को खुश करता है।

मुआवजे के रूप में यह सबसे अच्छी चीज है।

हममें से कुछ लोगों की यह धारणा भी है कि अगर किसी बच्चे के पास अधिक खिलौने* हैं, तो उसका मतलब है कि वह खुश है।

लेकिन हम कभी-कभी इस बिंदु को याद करना चाहिए कि आपके बच्चे को किस तरह के खिलौने की जरूरत है।

और वह कौन सी चीज है जो हमारे बच्चे मांगते हैं?

उत्तर: खेलने का समय।

उनकी अलमारी में रखे जाने वाले खिलौनों को खेलने का समय। बाहर जाने और खुले में खेलने का समय।

मिट्टी में खेलने और गंदे होने का समय, और यह सभी उस उम्र के लिए सच और सही है।

बस उन्हें खेलने का समय दें, वे अधिक खुश रहेंगे।

Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

क्या होगा अगर मेरा बच्चा खाना* नहीं चाहता है?

क्या होगा अगर मेरा बच्चा खाना* खाना नहीं चाहता है? कई बार बच्चे खाना* नहीं खाना चाहते। वह अब सुस्त और गुमसुम सा रहता है। ज्यादा देर खेलता भी नहीं। पूरे दिन चिड़चिड़े से रहते है। शाम को खेलने या पड़ने में मन नहीं लगता। इस तरह की समस्या के समाधान दो आसान उपाय हो सकते हैं।

अनिल एक बहुत चंचल बच्चा है, क्लास में भी हर गतिविधि में बाकी बच्चों कि ही तरह भाग लेता रहा है। घर में भी उसे देख कर किसी को खास चिंता नहीं होती थी। मगर पिछले तीन चार महीनों से उसकी ये आदतें बदल सी गई है। वह अब सुस्त और गुमसुम सा रहता है। ज्यादा देर खेलता भी नहीं। पूरे दिन चिडचिड़ा सा रहता है। अब शाम को खेलने या पड़ने में भी उसका मन नहीं लगता। अनिल के घर वाले ये सब महसूस कर रहे हैं। 

क्या होगा अगर मेरा बच्चा खाना* खाना नहीं चाहता है? वह अब सुस्त और गुमसुम सा रहता है। इस तरह की समस्या के समाधान दो आसान उपाय हो सकते हैं।

क्या होगा अगर बच्चा खाना* नहीं खाना चाहते?

अब इस तरह की समस्या के समाधान दो आसान उपाय हो सकते हैं। 

1. यह निश्चित करना की बच्चा बीमार नहीं है या पेट में कीड़े नहीं है, आप डॉक्टर से परामर्श  करें।

2. क्या बच्चे की दिनचर्या में ऐसा कोई बदलाव आया है, जिसके कारण वो ऐसा कर रहा है। 

पहली स्थिति में तो डॉक्टर के दिए दिशा निर्देशों का पालन करें। दूसरी स्थिति में बहुत से कारण हो सकते हैं।

जिनमे से सबसे आसानी के सुधार पाने वाला कारण भोजन  से सम्बन्धित हो सकता है।

यदि हाल ही में आपके बच्चे की खुराक में बदलाव आया है तो

यह भी व्यवहार में बदलाव का कारण हो सकता है। 

बच्चे की बदलती खुराक के कई कारण हो सकते हैं:

  • उनका मूड – वह थका हुआ, परेशान या उत्तेजित महसूस करेगा तो उनकी खुराक में बदलाव होगा। 
  •   उनकी सेहत : बच्चों की सेहत ठीक नहीं होने पर भी उनकी खुराक कम हो जाती है। ऐसे में जब बच्चे ठीक हो जाते हैं, तो वापस खुराक में सुधार आने लगता है। 
  • दिन का समय: यदि हर दिन भोजन करने के समय में बदलाव आता है, तो खुराक भी अलग हो सकती है। 
  • भोजन के प्रकार की पेशकश: परोसे गए भोजन का भी खुराक पर असर होता है। यदि बच्चे ने नाश्ता बहुत सारा या गरिष्ट किया है तो भी उस भूख कम लगेगी। भोजन बच्चे की पसंद का है या नहीं यह भी खुराक में बदलाव लाता है।
  • वे कितने सक्रिय हैं। यदि बच्चा सामान्य रूप से खेलता है या दिन में ज्यादा समय बैठ कर बीतता है तो दोनो स्थिति में उसकी खुराक में अंतर होगा।

  • यदि आपका बच्चा कभी-कभी भोजन नहीं करता या बहुत कम खाता है तो यह ठीक है।
  • एक बार का भोजन या स्नैक  छूट जाने से बच्चे के स्वास्थ को नुकसान नहीं पहुंचता। “नहीं” कहना आपके बच्चे की पसंद या आज़ादी का तरीका भी है।
  • यदि आपका बच्चा खाने के लिए नहीं बैठ सकता है, तो भोजन या नाश्ते से पहले कुछ समय उस शांत वातावरण दें।
  • भोजन के समय को शांत रखें और टीवी, सेल फोन, टैबलेट और कंप्यूटर बंद कर दें।
  • खाने के लिए पुरस्कार के रूप में मिठाई या पसंदीदा भोजन का उपयोग करना आवश्यक नहीं है।
  • यदि आपका बच्चा भोजन पसंद नहीं करता है, या खाना नहीं चाहता है, तो भोजन को हटा दें और 1 से 2 घंटे बाद एक स्वस्थ नाश्ता पेश करें।

इस तरह उस धीरे से ये समझ में आएगा कि खाना हर समय उपलब्ध नहीं होगा।

उस जब भोजन परोसा गया है, तब नहीं खाने पर, फिर उसे अगले कुछ घंटे कुछ नहीं मिलेगा।

इस तरह उसकी आदत पड़ जाएगी।

शुरू में ऐसा करना थोड़ा कठिन होगा या अच्छा नहीं लगेगा,

मगर, एक दो हफ्ते में बच्चे की खुराक और आदतों में बदलाव जरूर आयेगा।

मां के दिमाग में आने वाले कुछ और सवाल – 

अपने और बच्चे के  जीवन को आसान करने के लिए आप सभी को शुभकामनाएं

Happy childhood is every child’s right.

All the best wishes to you on this amazing journey. This will surely give us easy life.

If these tips help you in finding your answer, please comment. You can also comment, if you are having any other questions related to parenting.