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प्ले स्कूल में बच्चे क्या सीखते हैं/सीखेंगे?

प्ले स्कूल-क्या सीखते हैं? आधुनिक जीवनशैली में जब बच्चा 2साल का हो जाता है, तो  स्वाभाविक रूप से कुछ प्रश्न माता व पिता के दिमाग में आते है:

  • बच्चे को किस प्ले स्कूल या प्राइमरी स्कूल में डाले?
  • कब डालें?
  • प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?
प्ले स्कूल-क्या सीखते हैं? आधुनिक जीवनशैली में जब बच्चा 2साल का हो जाता है, तो  स्वाभाविक रूप से कुछ प्रश्न माता व पिता के दिमाग में आते है, जैसे कि बच्चे को किस प्ले स्कूल या प्राइमरी स्कूल में डाले, कब डालें, प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?
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 यदि आप भी उन अभिभावकों में से एक हैं, जिन्हें अपने बच्चे को एक प्ले स्कूल में भेजने या ना भेजने के बीच निर्णय लेना है, तो उन्हें पहले प्ले स्कूल की शैक्षणिक दिनचर्या को मोटे तौर पर समझना  चाहिए।

प्ले स्कूल-क्या सीखते हैं:

प्ले स्कूल एक अनौपचारिक शैक्षणिक स्थल है

 आप मान सकते हैं कि प्ले स्कूल एक अनौपचारिक शैक्षणिक स्थल है,

जहां बच्चों को औपचारिक शिक्षा से पूर्व स्वयं और आसपास के जीवन का अवलोकन करना व उनसे सामंजस करना सिखाया जाता है।

प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?

इस प्रकार प्ले स्कूल बच्चों को समझ हासिल करने में सक्षम बनाता है।

गणित का प्रारंभिक ज्ञान

 बच्चों को गणित का प्रारंभिक ज्ञान भी यहां दिया जाता है, गणित के बेसिक समझ को बच्चों तक पहुंचाने के लिए विशेष रूप से बनाई गई, आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

बच्चे को ठोस, हेरफेर करने वाले शब्दों के माध्यम से गणित का परिचय दिया जाता है, जो, उसे बुनियादी अवधारणाओं को समझने में सक्षम बनाता है। 

जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ती है, वह विशेष रूप से डिज़ाइन की गई सामग्रियों का उपयोग करके जोड़, घटाव, गुणा और भाग के साथ काम करना शुरू कर देता है।

भाषा का ज्ञान

 भाषा का ज्ञान इस कार्यक्रम के  बुनियादी कौशल में शामिल है। इसकी शुरुआत,

  • सुनकर खेले जाने वाले खेल,
  • पहेलियां और अक्षरों को उंगलियों से बनाना सिखा कर, किया जाता है।
  • विशेष रूप से  डिजाइन की गई शिक्षा सामग्री बच्चों को यह समझने में सक्षम बनाती है, की अलग-अलग ध्वनियों को एक साथ कैसे जोड़ कर, हम, शब्द बना सकते हैं।

 यह क्षेत्र मौखिक भाषा,भाषा के विकास, लिखित, अभिव्यक्ति, पढ़ने और व्याकरण में पकड़ मजबूत बनाने में मदद करता है।

प्रैक्टिकल लाइफ बच्चों को टास्क  प्रबंधन

 प्रैक्टिकल लाइफ बच्चों को टास्क  प्रबंधन सिखाती है, जैसे कि

  • खुद से ठिफिन खोलकर उसमें से खाना निकालकर खाना,
  • पानी पीने के लिए बॉटल का प्रयोग करना,
  • मोजे व शूज पहनना, रुमाल रखना,
  • खुद को स्वक्छ व व्यवस्थित रखना,
  • अपने सहपाठियों, माता पिता व बुजुर्गजनों से सद्व्यवहार आचरण करना व
  • समाज के प्रति जिम्मेदार होना।

प्ले स्कूल में डालने से बच्चे क्या सीखेंगे?

 इस प्रकार प्ले स्कूल का क्षेत्र भविष्य में  मिलने वाली औपचारिक शिक्षा का मजबूत आधार है, बच्चों को किसी भी कार्य की शुरुआत, मध्य  और अंत के बीच अंतर का ज्ञान होता है।

बच्चों में स्वयं की देखभाल, आदेश का पालन, मांसपेशियों का समन्वय, पर्यावरण की देखभाल और सामाजिक संबंधों को समझने में सहायता व विकास करने में मदद करता है।

बच्चों में अपने कार्यों को खुद कर पाने का कॉन्फिडेंस/विश्वास बढ़ता है।

क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है? पहले इन कुछ बिंदुओं पर विचार जरूर करें   क्या आपको अपने बच्चे को प्ले स्कूल भेजना चाहिए?

इस अद्भुत यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। 

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अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की 9 टिप्स

अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की 9 टिप्स

माता पिता का बच्चों के साथ बिताया समय ऐसा होना चाहिए वो सही मायनों में बच्चों को दिया गया विशेष समय हो।

 यहां व्यस्त परिवारों के लिए नौ सुझाव दिए गए हैं:
माता पिता का बच्चों के साथ बिताया समय ऐसा होना चाहिए वो सही मायनों में बच्चों को दिया गया विशेष समय हो।
 यहां व्यस्त परिवारों के लिए नौ सुझाव दिए गए हैं:
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अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय (क्वालिटी टाइम) व्यतीत नहीं कर पा रहे हैं?

आज हर व्यक्ति का जीवन बहुत व्यस्त है और काम और जीवन की जिम्मेदारियों के बीच, दिन पलक झपकते ही बीत जाते हैं। इससे बीच माता-पिता को ये चिंता सताती कि वे अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय (क्वालिटी टाइम) व्यतीत नहीं कर पा रहे हैं। 

उन्हें चिंता रहती है कि इससे बच्चों के विकास में देरी हो सकती है।

ऐसे में जब आप घर में रहने वाले माता-पिता का एक सोशल मीडिया पोस्ट देखते हैं।

 जिसमें वे अपने बच्चों को पढ़ा रहे है, उनके साथ चित्रकारी कर रहे है या स्थानीय चिड़ियाघर ले जा रहें हैं, तो आपकी चिंता और बढ़ जाती है।

आप निराश ना हों! हाल के अध्ययनों से पता चला है कि समय की मात्रा की तुलना में गुणवत्ता से समय बिताना अधिक महत्वपूर्ण है। 

यहां हम बच्चों को कम समय देने की या उनका समय काटने की बात नहीं कर रहे हैं। बच्चों को माता-पिता और देखभाल करने वालों के साथ उच्च-गुणवत्ता वाला समय चाहिए। 

माता-पिता के साथ बिताया गया गुणवत्ता का समय बच्चों के लिए अधिक फायदेमंद होता है। और यह अनुभव बड़े होने पर उन पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। 

माता पिता का बच्चों के साथ बिताया समय ऐसा होना चाहिए वो सही मायनों में बच्चों को दिया गया विशेष समय हो।

 यहां व्यस्त परिवारों के लिए नौ सुझाव दिए गए हैं:

1. “हमारा” समय

     अपने बच्चे के साथ दैनिक रूप से बैठिए। आप इससे “हमारा” समय कह कर भी संभोधित कर सकते है। और यदि ऐसा करना संभव ना हो तो अन्य तरीकों को अपनी दिनचर्या में जोड़ें।

जैसे कि आपके बच्चे के लंच बॉक्स में एक नोट छोड़ना या घर के व्हाइटबोर्ड पर कुछ अच्छा लिखना।

2. दैनिक कार्य

     आप और आपके बच्चे के लिए एक विशेष कार्य निश्चित करें जो आप रोज करें।

उदाहरण के लिए, सोने से पहले बच्चे की रुचि की कोई किताब उसके साथ पढ़ें।

3. प्यार का महत्व

     अपने बच्चे को बताएं कि आप हर दिन उससे प्यार करते हैं।

और उसे बताएं कि वह आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है और वह आपको कैसा महसूस कराता है।

4. प्रशंसा करें

     उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा आपके कहे बिना ही कुछ अच्छा करे तो उसकी प्रशंसा जरूर करें।

4. साथ खाएं

     जब भी संभव हो अपने बच्चों के साथ भोजन बनाएं और खाएं। यदि समय सीमित है, तो साधारण कुछ ऐसा बनाए जो आसान है और जिसमें बहुत कम तैयारी की आवश्यकता हो।

सेब जैसे स्वस्थ स्नैक कहते हुए भी आप बच्चों से दिन भर की बातें कर सकते हैं।

6. “आप चुनें” 

     अपने बच्चे को उपयोग में आने वाला चीज़ों का चयन करने दें।

फिर यदि आपको लगे कुछ अनुचित खरीदा जा रहा है, तो उसके बारे में बच्चे को कारण सहित स्पष्टीकरण दें।  

7. अपने बच्चे के साथ खेलें

     अपने बच्चे के साथ खेलें। बच्चे के साथ बिताया गया हर समय उससे व्यक्तित्व विकास को सकारातमकता प्रदान करेगा।

8. मूर्ख बनो

     उनके प्रश्नों के उत्तर में कभी कभी आप मूर्ख बने रहें। या उनसे प्रश्न पूछें।

9. ध्यान भटकने वाली चीजें थोड़ी देर दूर रखें।

     जब आप अपने बच्चे के साथ समय बिताते हैं तो बाकी सब बंद कर दें।

फोन, आ ई पेड,, सोशल मीडिया या टेलीविजन ना देखें।

अपने बच्चे के साथ अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपको उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताने की जरूरत है। 

माता-पिता अपने बच्चे के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अद्भुत यात्रा में हम सब साथ हैं।
read: What should be a parent’s role in child’s life?

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क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है?

 क्या आपको अपने बच्चे को प्ले स्कूल में भेजना चाहिए? 

क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है?  इसका निर्णय लेने से पहले आपको कुछ विचार  करना चाहिए
क्या बच्चे को प्ले स्कूल भेजना जरूरी है? इसका निर्णय लेने से पहले आपको कुछ विचार  करना चाहिए

 इसका निर्णय लेने से पहले आपको कुछ विचार  करना चाहिए

 कुछ दशक पहले भारत में प्ले स्कूलों की आवश्यकता अनसुनी थी 

 बहुत कम लोग अपने बच्चों का प्ले स्कूल में दाखिला कराते थे,

फिर भी हर कोई परिपक्व, समझदार पढ़ा लिखा और और भाषा का जानकार होता था

अब हालांकि ऐसा लगता है जैसे हर माता-पिता अपने बच्चे को प्री नर्सरी या प्लेस्कूल में भेज देते हैं

 भारत में अधिकांश प्ले स्कूल निजी है

 यदि आप भी उनमें से एक है जो अपने बच्चे को प्ले स्कूल या प्री नर्सरी में भेजना चाहते हैं तो पहले इन कुछ बिंदुओं पर विचार जरूर करें 

समय

 क्या आपके पास अपने बच्चे के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय है? 

प्ले स्कूल में जाकर बच्चों को दूसरे बच्चों के साथ बैठने और स्कूल के वातावरण की आदत पड़ जाती है ऐसे में औपचारिक शिक्षा के लिए स्कूलों में भर्ती होने पर उन्हें कम परेशानी होती है 

 यदि आप और आपके जीवनसाथी दोनों काम के लिए घर से बाहर रहते हैं और आपके पास अधिक समय नहीं है, तो आप अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए समय नहीं दे पाएंगे

इस अवस्था में आप अपने बच्चे को प्लेस्कूल में भर्ती करवा सकते हैं

 हालांकि अगर माता या पिता में से कोई एक घर पर रुकता है एवं अपने बच्चे को पढ़ाने का समय निकाल सकता है तो आपको अपने बच्चे को प्लेस्कूल में भर्ती करवाना  अनिवार्य नहीं है

 याद रखें बहुत छोटे बच्चों में सीखने की अद्भुत क्षमता होती है

उनका दिमाग बहुत तेज होता है, अनुकूल वातावरण मिलने पर बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं

 शैक्षणिक दिनचर्या

 अपने बच्चे को प्ले स्कूल में डालने से पहले  प्लेस्कूल के बारे में कुछ जानकारी हासिल करें कोई ऐसा स्कूल खोजें जहां  बच्चों को सिखाने के लिए खेलकूद के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है 

जहां आपके बच्चे को नई चीजें सीखने के लिए संघर्ष न करना  हो

सामाजिक अवसर

 प्ले स्कूल बच्चों को अन्य बच्चों के साथ मिलजुल कर रहने का अवसर प्रदान करते हैं

इसके अलावा वहां धीरे-धीरे एक अनौपचारिक तरीके से अभ्यास कराया जाता है जिससे बच्चों को औपचारिक स्कूल में भर्ती होने पर परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता

इसलिए यदि आप एक अलग-थलग पड़ोस में रहते हैं या ऐसी जगह पर जहां आपके बच्चे के उम्र के कई बच्चे नहीं है तो आप जरूर अपने बच्चे को एक प्लेस्कूल में भेजने का तय कर सकते हैं

 आपका बच्चा छोटी उम्र में कई बच्चों के साथ बातचीत करना सीखेगा 

अपने बच्चे को प्ले स्कूल भेजने के सामाजिक लाभ ले, लेकिन चमत्कार की उम्मीद ना करें

 यदि आपका बच्चा शर्मिला है तो उसे प्लेस्कूल में  भेजने मात्र से वह आत्म विश्वासी व्यक्ति नहीं बन जाएगा

अपने बच्चे के आत्मविश्वास का विकास करने के लिए आपके पास अन्य तरीके भी हैं,

यदि आपके आसपास कोई स्थानीय क्लब है  तो आप अपने बच्चे का वहां खेल में दाखिला करवा सकते हैं

दिनचर्या

 प्ले स्कूल में भेजने से आपके बच्चे की एक दिनचर्या बन जात हैं 

 हालांकि यह भी याद रखें कि जो बच्चे प्लेस्कूल में नहीं जाते वह भी 12 से 14 साल स्कूल और कॉलेज में जाकर एक दिनचर्या के आदी हो जाते हैं

 उनका व्यक्तित् उनकी सोचऔर उनके द्वारा उठाए गए कार्य पर निर्भर करता है, ना की  इस बात पर की उन्होंने अपने प्रारंभिक शिक्षा प्लेस्कूल से की है या नहीं

Read in English: Is Playschool Education Necessary?

Related topic: Happy Childhood, let me put it differently

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गृह कार्य का उद्देश्य क्या है?

क्या आपको लगता है आपके बच्चे को गृह कार्य करने में परेशानी हो रही है?  यदि हां तो जाने की गृह कार्य देने का उद्देश्य क्या होता है- 

क्या आपको लगता है आपके बच्चे को गृह कार्य करने में परेशानी हो रही है?  यदि हां तो जाने की गृह कार्य देने का उद्देश्य क्या होता है-
गृह कार्य होमवर्क क्यों दिया जाता है?

होमवर्क या गृह कार्य क्यों दिया जाता है?

गृह कार्य देना या ना देना स्कूल या शिक्षक या अन्य किसी स्थानीय दृष्टिकोण पर आधारित होता है 

 कुछ शिक्षक  दूसरी कक्षा तक बच्चों को होमवर्क नहीं देते हैं

जबकि कुछ किंडर गार्डन में गृह कार्य देना आरंभ करते हैं

 कुछ शिक्षक होमवर्क बनाते हैं जबकि अन्य पहले से तैयार वर्कशीट का  उपयोग करते हैं

अभिभावक अपने बच्चों का गृह कार्य ना करें

 अधिकांश शिक्षक गृह कार्य का उपयोग यह जानने के लिए करते है कि बच्चा क्या और कितना जानता है

  वे नहीं चाहते कि माता-पिता अपने बच्चों का होमवर्क करें

शिक्षक अभिभावकों से आशा रखते हैं कि अभिभावक सुनिश्चित करें कि होमवर्क पूरा हो गया है

यदि  अभिभावकों को कोई गलती नजर आए तो वे उसकी समीक्षा करें 

अपने बच्चों का प्रयोजन कार्य / प्रोजेक्ट ना करें

 शिक्षक नहीं चाहते कि माता-पिता अपने बच्चों का प्रयोजन कार्य/ प्रोजेक्ट बनाएं

 अपितु वे चाहते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों का मार्गदर्शन करें और प्रोजेक्ट में लगने वाली आवश्यक वस्तुओं का प्रबंध करें

आप चाहे तो इसके बारे में शिक्षक से जानकारी लेकर अपने बच्चे के साथ इसकी समीक्षा करें

गृह कार्य एवं रोज की पढ़ाई करने के लिए घर का कोई एक स्थान निश्चित करें

 सभी बच्चों को एक ही चीज की जरूरत होती है और वह है एक साफ-सुथरी जगह

 लेकिन ध्यान रखें कि प्रत्येक बच्चा अलग तरीके से काम करता है

 कुछ अपना काम रसोई की मेज पर तो कुछ अपने कमरे की डेस्क पर करना पसंद करते हैं

स्वभाव को देखते हुए उसके बैठक की जगह और समय सुनिश्चित करें

 कुछ बच्चे स्कूल के ठीक बाद होमवर्क करना पसंद करते हैं

दूसरों को एक लंबे समय के ब्रेक की आवश्यकता होती है

कुछ बच्चों को  शाम को कुछ नाश्ता करने के बाद होमवर्क करना पसंद आता है

 यदि आपका बच्चा स्कूल से आने के बाद अन्य किसी  क्लासेस के लिए जाता है तो होमवर्क करने का कोई एक समय निर्धारित कर ले

 आप जो भी दिनचर्या चुनते हैं अपने बच्चे को उसके अनुसार कार्य करने में  मार्गदर्शन करें

जाने कि आपका बच्चा  कैसे सबसे अच्छा अध्ययन करता है

उदाहरण के लिए, 

  • कुछ बच्चे शब्दों को वर्तनी लिखकर 
  •  दूसरे उसे आंखें बंद करके और उन्हें चित्रित करके उन्हें जोर से कहते हुए सीखेंगे 
  • बच्चों को अध्ययन के लिए एक अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है
  •  कुछ बच्चे  संगीत सुनना चाहते हैं
  • कुछ को और के बीच में ही रह कर पढ़ने से मदद मिलती है 

 बच्चों को अनुकूल वातावरण चाहिए

 अपने बच्चे के व्यक्तित्व के अनुसार आप उन्हें घर का वातावरण  दे

अपने बच्चे के साथ है, मगर आसपास मंडे राय नहीं

 यह ध्यान रखें कि यह उनका कार्य है, आपका नहीं

आप उनके लिए तब उपलब्ध रहें जब उन्हें आपकी जरूरत हो

  एक्सपर्ट्स के अनुसार

एक आदर्श सेटअप में माता पिता अपना काम करते रहेंगे और बच्चा पास ही बैठा अपना ग्रह कार्य कर रहा होगा

लेकिन यह हमेशा संभव नहीं है

कई बार माता-पिता के पास अपने काम होते हैं

 उन्हें काम के सिलसिले में  घर से बाहर जाना पड़ता है या फिर मां को खाना पकाने के लिए रसोई में रहना होता है

यदि आप घर पर हैं तो अपने बच्चे को बताएं कि आप सहायता के लिए उपलब्ध है पर आप साथ में अपना भी काम कर रहे हैं

 यदि आप घर पर उपलब्ध नहीं है तो सुनिश्चित करें की एक विश्वसनीय वयस्क वहां हो जो कि आवश्यकता पड़ने पर बच्चे को होमवर्क में मार्गदर्शन दे सके

 यह भी याद रखें कि हर होमवर्क एक समान नहीं होता  इसलिए हर चीज पर आपके ध्यान की आवश्यकता नहीं होती

 मीडिया एक्स्पोज़र को सीमित  करें

जब आपका बच्चा होमवर्क करता है तो टीवी बंद कर दें। जब तक किसी जानकारी के लिए कंप्यूटर की आवश्यकता ना हो उसे भी बंद रखें

  बच्चे के होमवर्क शुरू करने से पहले आप उससे पूछ सकते हैं कि उसे अपना कार्य करने में कितना समय लगेगा

 याद रखें यदि कमरे में आप टीवी देख रहे हैं तो आपके बच्चे का ध्यान गृह कार्य में नहीं लगेगा

शिक्षक को बताएं कि आपने अपने बच्चे के गृह कार्य में उसकी कितनी मदद की है

यदि आपके बच्चे को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है या वास्तव में कुछ समझ में नहीं आया है तो शिक्षक को बताएं 

शिक्षक को सूचना देने के लिए आप निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं

  •  असाइनमेंट पर लिखें की कार्य अभिभावक की मदद से किया गया है  
  • डायरी में लिखे या अलग से नोट कॉपी में लगा दे 

शिक्षकों द्वारा होमवर्क करने के कई उद्देश्य हो सकते हैं

  • जिसमें अभ्यास करवाना या
  • देखना कि बच्चा कितना सीख चुका है
  • उसे किन  विषयों में मदद की आवश्यकता है मूलभूत कारण होते हैं

इस अद्भुत यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। 

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To read in English: What the point of homework?

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बच्चे अपने जीवन में खिलौने* क्यों पसंद करते हैं?

बच्चे अपने जीवन में खिलौने क्यों पसंद करते हैं? यह उसी कारण से है जिस कारण हम वयस्क हमारे मनोरंजन के लिए चीजें चाहते हैं। खिलौने बच्चों और वयस्कों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम कार, बाइक, बेस्ट गैजेट, बेस्ट ड्रेस आदि रखना चाहते हैं। बच्चों के लिए यह जगह उनके खिलौनों से भर जाती है। एक बच्चे को अलग-अलग उम्र में अलग-अलग खिलौने पसंद आ सकते हैं।

खिलौने*? बच्चे अपने जीवन में खिलौने* क्यों पसंद करते हैं? यह उसी कारण से है जिस कारण हम वयस्क हमारे मनोरंजन के लिए चीजें चाहते हैं।

To read this article in english: Why do children like to have toys in their life?

खिलौने* बच्चों और वयस्कों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हम कार, बाइक, बेस्ट गैजेट, बेस्ट ड्रेस आदि रखना चाहते हैं।

बच्चों के लिए यह जगह उनके खिलौनों से भर जाती है।

एक बच्चे को अलग-अलग उम्र में अलग-अलग खिलौने पसंद आ सकते हैं।

जानिए कुछ ऐसे खिलौने* जो हर उम्र के पसंद आते हैं।

जानिए कुछ ऐसे खेल, जो किसी भी उम्र में पसंदीदा हैं:

कैरम:

कैरम (स्पेल्ड कैरम) भी दक्षिण एशियाई मूल का खेल आधारित प्रचलित है।

यह खेल भारत, बांग्लादेश, अफग़ानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, अरब देशों और आसपास के क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है, और विभिन्न भाषाओं में विभिन्न नामों से जाना जाता है।

दक्षिण एशिया में, कई क्लब और कैफे नियमित टूर्नामेंट आयोजित करते हैं। कैरम आमतौर पर बच्चों और सामाजिक स्तर में परिवारों द्वारा खेला जाता है।

शतरंज:

शतरंज एक दो-खिलाड़ी वाला खेल है जो एक बिसात पर खेला जाता है जिसमें 64 वर्गों को 8 × 8 ग्रिड में व्यवस्थित किया जाता है।

यह खेल दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा खेला जाता है। माना जाता है कि शतरंज 7 वीं शताब्दी से कुछ समय पहले भारतीय खेल चतुरंग से लिया गया था।

चतुरंगा पूर्वी रणनीति के खेल xiangqi, janggi, और शोगी का संभावित जनक भी हैं।

 लेगो:

लेगो का इतिहास लगभग 100 वर्षों का है, जिसकी शुरुआत 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में लकड़ी के छोटे-छोटे नट बनाने से हुई थी।

डेनमार्क में प्लास्टिक लेगो ईंटों का निर्माण 1947 में शुरू हुआ।

 लूडो:

लूडो दो से चार खिलाड़ियों के लिए एक रणनीति बोर्ड गेम है, जिसमें खिलाड़ी एक ही डाई के रोल के अनुसार चार टोकन शुरू से अंत तक दौड़ते हैं।

अन्य क्रॉस और सर्कल गेम्स की तरह, लूडो भारतीय खेल पचीसी से लिया गया है, लेकिन यह सरल है।

खेल और इसकी विविधताएं कई देशों में कई और नामों से लोकप्रिय हैं।

साँप और सीढ़ी:

साँप और सीढ़ी एक प्राचीन भारतीय बोर्ड खेल है जिसे आज दुनिया भर में क्लासिक माना जाता है।

यह एक गेमबोर्ड पर दो या दो से अधिक खिलाड़ियों के बीच खेला जाता है, जिसमें गिने-चुने वर्ग होते हैं।

बोर्ड पर कई “सीढ़ी” और “सांप” चित्रित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में दो विशिष्ट बोर्ड वर्ग हैं।

खेल सरासर भाग्य पर आधारित एक सरल दौड़ है, और छोटे बच्चों के साथ लोकप्रिय है। 

बच्चे अपने जीवन में खिलौने* क्यों पसंद करते हैं? यह उसी कारण से है जिस कारण हम वयस्क हमारे मनोरंजन के लिए चीजें चाहते हैं।

बच्चे कई कारणों से खिलौनों से जुड़ते हैं:

  • खिलौने बच्चों को सुखद समय और खुश यादों के साथ जोड़ देते हैं।
  • खिलौने जो बच्चे को वास्तविक जीवन की गतिविधियों से जुड़ने या उनकी नकल करने की सुविधा देते हैं, बच्चों को सबसे अच्छे लगते हैं।।
  • यह एक दोस्त के रूप में, बच्चे के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान को भरता है।
  • खिलौने सामाजिक समारोह में भी उन्हें व्यस्त रखते हैं।
  • बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं, अगर उनके पास उनका खिलौना है।
  • आपने देखा होगा कि एक बच्चा नई जगह पर, ऊबने की शिकायत करने लगता है। इस तरह की स्थितियों में, अगर उसके पास अपना खिलौना है, तो यह शिकायत इतनी जल्दी नहीं आ सकती है।
  • खिलौने उनकी कल्पना शक्ति को बढ़ाए हैं और साथ ही उनकी काल्पनिक कहानियों में पत्र बनकर मदद करते हैं।
  • अन्य बच्चों के साथ बातचीत शुरू करने के लिए भी खिलौने* महत्वूर्ण साधन है।

हर उम्र में हर बच्चे के लिए हमेशा एक पसंदीदा खिलौना होता है। बच्चा खिलौने* से जुड़ा हुआ महसूस करता है। कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स में उल्लेख करें आपको कौन सा खेल या खिलौना पसंद है।

खुश रहना हर बच्चे का अधिकार है।

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खिलौने? क्या बच्चों को खिलौनों से भरा कमरा चाहिए? पुनर्विचार। 

खिलौने? क्या बच्चों को खिलौनों से भरा कमरा चाहिए? पुनर्विचार करें।

इस तरह से मैं हर बार खुद का मूल्यांकन करती हूं

जब मैं एक खिलौने की दुकान से गुजरती हूं

और मेरी बेटी मेरी तरफ बहुत आशा और उत्साह के साथ देखती है।

क्या बच्चों को खिलौनों से भरा कमरा चाहिए? पुनर्विचार करें। इस तरह से मैं हर बार खुद का मूल्यांकन करती हूं, जब मैं एक खिलौने की दुकान से गुजरती हूं और मेरी बेटी मेरी तरफ बहुत आशा और उत्साह के साथ देखती है।

लेकिन भगवान को  धन्यवाद, मेरे बच्चे अब समझते हैं, उन्हें बाजार में देखे जाने वाले प्रत्येक खिलौने* को खरीदने की आवश्यकता नहीं है।

मैं कुछ तरीके साझा करूंगी, यह उन पर दबाव डाले बिना या उन्हें वंचित महसूस किए बिना किया जा सकता है।

To read in English: Do children need a room full of toys? Rethink.

खिलौने की जरूरत का मूल्यांकन:

हम सभी के लिए बच्चों के साथ घूमने के लिए सबसे अच्छी जगह डिज्नी लैंड हो सकती है।

एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में एक बच्चे के लिए सबसे अच्छी जगह एक खिलौने* की दुकान या एक खेल क्षेत्र हो सकता है।

एक रिसॉर्ट में सबसे अच्छी जगह मैदान हो सकता है।

प्लेस्कूल में सबसे अच्छी जगह खिलौने* के कमरे हो सकते हैं।

लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि एक औपचारिक स्कूल में स्पोर्ट्स रूम, पसंदीदा की सूची में कभी क्यों नहीं आता है?

बस समय में वापस जाओ, और हमें क्या मिलेगा? यह की एक स्कूल में होने वाली पसंदीदा जगहों की सूची में हमेशा शीर्ष पर रहने वाला खेल मैदान ही था।

घर पर खिलौनों के सर्वोत्तम स्रोत:

बच्चों को खिलौने मिलते हैं, उनके परिवार से, दोस्तों से और अब तो मैकडॉनल्ड्स में खाने के साथ भी मिलता है।

वे इन खिलौनों के साथ थोड़ी देर खेलते हैं और फिर यह उनकी अलमारी में जगह घेरता है।

 ऐसा नहीं है कि बच्चे अपने खिलौनों से नहीं खेलते, वे खेलते हैं।

लेकिन वे जल्द ही ऊब जाते हैं।

और एक बार जब बच्चे अपने खिलौनों से ऊब जाते हैं, तो बस इसे अलमारी के बड़े संग्रह में जोड़ देते हैं।

 आपके बच्चे के पास खिलौनों से भरा एक अलमीरा हो सकता है, दो कारणों से:

यह सबसे अच्छा उपहार है जो एक बच्चे को खुश करता है।

मुआवजे के रूप में यह सबसे अच्छी चीज है।

हममें से कुछ लोगों की यह धारणा भी है कि अगर किसी बच्चे के पास अधिक खिलौने* हैं, तो उसका मतलब है कि वह खुश है।

लेकिन हम कभी-कभी इस बिंदु को याद करना चाहिए कि आपके बच्चे को किस तरह के खिलौने की जरूरत है।

और वह कौन सी चीज है जो हमारे बच्चे मांगते हैं?

उत्तर: खेलने का समय।

उनकी अलमारी में रखे जाने वाले खिलौनों को खेलने का समय। बाहर जाने और खुले में खेलने का समय।

मिट्टी में खेलने और गंदे होने का समय, और यह सभी उस उम्र के लिए सच और सही है।

बस उन्हें खेलने का समय दें, वे अधिक खुश रहेंगे।

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क्या होगा अगर मेरा बच्चा खाना* नहीं चाहता है?

क्या होगा अगर मेरा बच्चा खाना* खाना नहीं चाहता है? कई बार बच्चे खाना* नहीं खाना चाहते। वह अब सुस्त और गुमसुम सा रहता है। ज्यादा देर खेलता भी नहीं। पूरे दिन चिड़चिड़े से रहते है। शाम को खेलने या पड़ने में मन नहीं लगता। इस तरह की समस्या के समाधान दो आसान उपाय हो सकते हैं।

अनिल एक बहुत चंचल बच्चा है, क्लास में भी हर गतिविधि में बाकी बच्चों कि ही तरह भाग लेता रहा है। घर में भी उसे देख कर किसी को खास चिंता नहीं होती थी। मगर पिछले तीन चार महीनों से उसकी ये आदतें बदल सी गई है। वह अब सुस्त और गुमसुम सा रहता है। ज्यादा देर खेलता भी नहीं। पूरे दिन चिडचिड़ा सा रहता है। अब शाम को खेलने या पड़ने में भी उसका मन नहीं लगता। अनिल के घर वाले ये सब महसूस कर रहे हैं। 

क्या होगा अगर मेरा बच्चा खाना* खाना नहीं चाहता है? वह अब सुस्त और गुमसुम सा रहता है। इस तरह की समस्या के समाधान दो आसान उपाय हो सकते हैं।

क्या होगा अगर बच्चा खाना* नहीं खाना चाहते?

अब इस तरह की समस्या के समाधान दो आसान उपाय हो सकते हैं। 

1. यह निश्चित करना की बच्चा बीमार नहीं है या पेट में कीड़े नहीं है, आप डॉक्टर से परामर्श  करें।

2. क्या बच्चे की दिनचर्या में ऐसा कोई बदलाव आया है, जिसके कारण वो ऐसा कर रहा है। 

पहली स्थिति में तो डॉक्टर के दिए दिशा निर्देशों का पालन करें। दूसरी स्थिति में बहुत से कारण हो सकते हैं।

जिनमे से सबसे आसानी के सुधार पाने वाला कारण भोजन  से सम्बन्धित हो सकता है।

यदि हाल ही में आपके बच्चे की खुराक में बदलाव आया है तो

यह भी व्यवहार में बदलाव का कारण हो सकता है। 

बच्चे की बदलती खुराक के कई कारण हो सकते हैं:

  • उनका मूड – वह थका हुआ, परेशान या उत्तेजित महसूस करेगा तो उनकी खुराक में बदलाव होगा। 
  •   उनकी सेहत : बच्चों की सेहत ठीक नहीं होने पर भी उनकी खुराक कम हो जाती है। ऐसे में जब बच्चे ठीक हो जाते हैं, तो वापस खुराक में सुधार आने लगता है। 
  • दिन का समय: यदि हर दिन भोजन करने के समय में बदलाव आता है, तो खुराक भी अलग हो सकती है। 
  • भोजन के प्रकार की पेशकश: परोसे गए भोजन का भी खुराक पर असर होता है। यदि बच्चे ने नाश्ता बहुत सारा या गरिष्ट किया है तो भी उस भूख कम लगेगी। भोजन बच्चे की पसंद का है या नहीं यह भी खुराक में बदलाव लाता है।
  • वे कितने सक्रिय हैं। यदि बच्चा सामान्य रूप से खेलता है या दिन में ज्यादा समय बैठ कर बीतता है तो दोनो स्थिति में उसकी खुराक में अंतर होगा।

  • यदि आपका बच्चा कभी-कभी भोजन नहीं करता या बहुत कम खाता है तो यह ठीक है।
  • एक बार का भोजन या स्नैक  छूट जाने से बच्चे के स्वास्थ को नुकसान नहीं पहुंचता। “नहीं” कहना आपके बच्चे की पसंद या आज़ादी का तरीका भी है।
  • यदि आपका बच्चा खाने के लिए नहीं बैठ सकता है, तो भोजन या नाश्ते से पहले कुछ समय उस शांत वातावरण दें।
  • भोजन के समय को शांत रखें और टीवी, सेल फोन, टैबलेट और कंप्यूटर बंद कर दें।
  • खाने के लिए पुरस्कार के रूप में मिठाई या पसंदीदा भोजन का उपयोग करना आवश्यक नहीं है।
  • यदि आपका बच्चा भोजन पसंद नहीं करता है, या खाना नहीं चाहता है, तो भोजन को हटा दें और 1 से 2 घंटे बाद एक स्वस्थ नाश्ता पेश करें।

इस तरह उस धीरे से ये समझ में आएगा कि खाना हर समय उपलब्ध नहीं होगा।

उस जब भोजन परोसा गया है, तब नहीं खाने पर, फिर उसे अगले कुछ घंटे कुछ नहीं मिलेगा।

इस तरह उसकी आदत पड़ जाएगी।

शुरू में ऐसा करना थोड़ा कठिन होगा या अच्छा नहीं लगेगा,

मगर, एक दो हफ्ते में बच्चे की खुराक और आदतों में बदलाव जरूर आयेगा।

मां के दिमाग में आने वाले कुछ और सवाल – 

अपने और बच्चे के  जीवन को आसान करने के लिए आप सभी को शुभकामनाएं

Happy childhood is every child’s right.

All the best wishes to you on this amazing journey. This will surely give us easy life.

If these tips help you in finding your answer, please comment. You can also comment, if you are having any other questions related to parenting. 


Posted in परवरिश में मददगार टिप्स

खाना? मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

खाना? मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

खाना? मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?बच्चों को खाना खिलाना, मां का दिन भर का सबसे बड़ा काम हो सकता है, और सबसे ज्यादा समय लेने वाला भी। इसी बीच जब बच्चे की थाली परोस दी गई है, पर वह नहीं खाता तो, मां, दिन भर उसके खाने की चिंता करती रहती है। ऐसे में एक प्रश्न जो मां के दिमाग में आता है –

मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

अक्सर इस प्रश्न के कई तरह के उत्तर मिलते हैं, जो, आस पास के लोग या घर के बड़ों के हम तक पहुंचते हैं।

अक्सर हम पूरे समय बच्चे के पीछे खाना लेकर घूमते रहते हैं। और कई बार हम बच्चे को जबरदस्ती खिलते है।

मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

अब आप ये तरीके भी अपनाकर देखें।

  • पूरे दिन खाने के लिए पीछे भागने के बदले, अपने बच्चे को दिन में 3 बार नाश्ता और 2 बार पूरा भोजन दें। 
  • हर दिन लगभग एक ही समय पर भोजन और नाश्ता परोसने का प्रयास करें। 
  • भोजन और नाश्ते का एक योजना बद्ध अनुकरण आपके बच्चे में खाने की आदतों को विकसित करने में मदद कर सकती है।
  • आपके बच्चे को आपके मुकाबले खाने में अधिक समय लग सकता है।
  •  उन्हें खाने को खत्म करने का समय दें। 
  • यदि आपको लगता है कि बच्चे का खाने में मन नहीं लग रहा और वो खाने से खेल कर रहा है, तो उसके सामने के खाना हटा दें, और उसको मेज से उतर कर खेलने छोड़ दें। 
  • इस तरह धीरे से बच्चा ये समझ जाएगा कि खेलना और खाना एक साथ नहीं हो सकता।
  • यदि बच्चे को कोई स्वस्थ से सम्बन्धित दिक्कत नहीं है, और वह रोज खेल कूद कर रहा है तो निश्चित रहें।
  •  बच्चे कभी भी भूखे नहीं रहते, वो अपनी आवशयकताओं के अनुसार खा लेते हैं।
  • बच्चे को दिन भर ना खिलाएं, इससे उन्हें भूख का अहसास नहीं होता।

Happy childhood is every child’s right.

All the best wishes to you on this amazing journey. This will surely give us easy life.

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