परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन!

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन ! एग्जाम पास आने के साथ ही थकावट ज्यादा नींद आना ज्यादा भूख लगना आम बात है परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन की तरफ परीक्षार्थी का ध्यान नहीं जाता आमतौर पर पढ़ने वाले बच्चों में एंट्रेंस एग्जाम 10वीं 12वीं या किसी अन्य परीक्षा के दौरान वजन बढ़ने पेट खराब रहने आलस आने जैसी शिकायतें सामने आती हैहेल्दी स्नैकिंग वो आखिरी चीज है जिसके बारे में एक स्टूडेंट सोचता है।

त्वरित कॉफी और टेक-वे पिज्जा की आदत डालना आसान है, क्योंकि आप भोजन पर विस्तार से समय बर्बाद नहीं करना चाहते हैं। लेकिन, वास्तव में, बच्चों के अध्ययन की योजना का एक हिस्सा अच्छा पोषण भी होना चाहिए क्योंकि आपके मस्तिष्क को जितना बेहतर ईंधन मिलेगा, आप उतना ही बेहतर अध्ययन करेंगे।

 एग्जाम पास आने के साथ ही थकावट ज्यादा नींद आना ज्यादा भूख लगना आम बात है परीक्षा के दौरान  पौष्टिक भोजन  की तरफ परीक्षार्थी का ध्यान नहीं जाता

एग्जाम के दौरान हेल्दी ईटिंग    फोटो Pexels से Giftpundits.com

चाहे आप एक परीक्षार्थी हैं या परीक्षार्थी की माता,  परीक्षा या उसकी तैयारी के दौरान किस तरह पौष्टिक भोजन दिनचर्या में शामिल हो सकता है यह जानने के लिए इन सुझावों  पर ध्यान दें

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

परीक्षा के दौरान सही भोजन के 10 सुझाव:

  1. दैनिक विटामिन और खनिज आवश्यकताओं की पूर्ति करने पर यह काम आसान हो जाएगा। अच्छी तरह से अध्ययन करने के लिए आवश्यक शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बनाए आवश्यक है जिसके लिए आयरन और विटामिन बी विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। आयरन युक्त खाद्य पदार्थ: रेड मीट, अनाज और पालक। कुछ खाद्य पदार्थ जिनमें बी विटामिन होते हैं: साबुत अनाज,, अंडे और नट्स। कुछ अन्य खाद्य पदार्थ जो मस्तिष्क के लिए पोषक तत्व प्रदान करते हैं वे हैं मछली और सोया। 
  2. दवाइयों की तुलना में भोजन हमेशा एक बेहतर विकल्प होता हैएक संतरे में न केवल विटामिन सी होता है, बल्कि फाइबर, बीटा कैरोटीन और अन्य खनिज भी होते हैं। फल आपके दिमाग के लिए सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों में से एक है। फलों की प्राकृतिक शर्करा स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करती है। ब्लूबेरी में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट और अन्य पोषक तत्व होते हैं। 
  3. नियमित भोजन करना पोषक तत्वों और ऊर्जा के स्तर को अधिक स्थिर रखने में मदद करता है। नियमित अंतराल पर खाएं।
  4. थोड़ा-थोड़ा खाइए कई बार खाइए  दिन में तीन बार ज्यादा खा लेने से मस्तिष्क और शारीरिक रूप से आप थोड़े दिन में हो जाते हैं। एक सैंडविच, ताजे फल, फ्रूट स्मूदी, ड्राई फ्रूट्स, शहद में लिपटे नट्स, सूप, दिलचस्प सलाद आदि अच्छे विकल्प हैं।
  5. दोस्तों से नाश्ते  पर मिलिए  अगर आपको लगता है की पढ़ाई के लिए आपको अपने मित्रों से मिलना है तो इसके लिए समय सुबह नाश्ते के दौरान निकालिए। ओट्स, मूसली, उपमा, खिचड़ी, इडली आदि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के साथ बढ़िया विकल्प हैं जो ग्लूकोज की निरंतर और स्थिर आपूर्ति प्रदान करते हैं।
  6. जल ही जीवन है। जब आप अपने कमरे में ऐसी चला कर आराम से बैठे हैं तो आपको प्यास नहीं लगती है और इसलिए आप कम तरल पदार्थ पीते हैं। निर्जलित होने पर, शरीर और मन चकित, बेचैन होने लगता है। पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना कठिन  हो जाता है। अपने पेय पदार्थों का चुनाव सूझबूझ से करें। कैफीन, चीनी का सेवन कम करें। चूंकि बहुत अधिक कैफीन आपको चिड़चिड़ा बना सकती है, मध्यम मात्रा में पीने की कोशिश करें: प्रति दिन 400 से 450 मिलीग्राम, 2 / 2.5 कप के बराबर, (16 से 20 औंस या 500 से 625 मिलीलीटर)। पानी, फलों का रस, दूध, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, मिल्कशेक, ताजा सूप, नींबू पानी, लस्सी और नारियल पानी बेहतर विकल्पों में शामिल हैं। वातित पेय से बचें। प्रति दिन कम से कम 8-10 गिलास पानी लें।
  7. पावर पैक्ड सब्जियां चुनेंसभी सब्जियां  मैं एक समान पोषक तत्व नहीं होते हैं। गहरे रंग की  सब हल्के रंग की सब्जियों के अपेक्षा ज्यादा पोषक तत्व होते हैं
  8. पढ़ाई करते समय स्मार्ट तरीके से नाश्ता करें। पोषक तत्वों को संतुलित करने और अपने रक्त-शर्करा के स्तर को स्थिर रखने के लिए अपने स्नैक्स को दो खाद्य समूह  मैं /करें। जब आप देर रात तक पढ़ रहे हों भोजन के बीच में हेल्दी स्नैक्स खाएं जैसे प्रोटीन बार, ताजे फल, मूंगफली, मखाना और भुना हुआ चना आदि।
  9.  मस्तिष्क को अच्छी तरह से खिलाना आसान है ब्रेन बूस्टिंग फूड्स में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं जो स्मृति और एकाग्रता में सुधार करते हैं जैसे- बादाम, अखरोट, मछली, केला, चना, पालक, ब्रोकोली, आदि 
  10. जंक फूड से बचें।। चॉकलेट, कुकीज़ आदि जैसे खाद्य पदार्थ रक्त में शर्करा के स्तर में अचानक वृद्धि कर सकते हैं। थोड़ी देर के बाद, पेट फिर खाली लगता है।

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

10 वीं टिप तक बने रहने के लिए धन्यवाद।

आपके परीक्षा के समय को कम तनावपूर्ण बनाने के लिए आपके लिए अतिरिक्त 6 महत्वपूर्ण सुझाव।

  1. आठ घंटे की अच्छी नींद जरूरी है। अच्छी नींद आपके मस्तिष्क के लिए उतनी ही  अच्छी है जितना शरीर के लिए भोजन। कम नींद सीखने की क्षमता में बाधा उत्पन्न कर सकती है, मूड स्विंग का कारण बन सकती है और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कम कर सकती है।
  2. अपने आप को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रखें।खुद को खुश और प्रेरित रखने के लिए कुछ मनोरंजक गतिविधि के लिए प्रतिदिन एक घंटा घर से बाहर निकालें।
  3. तनाव कम रखने वाले खाद्य पदार्थ  का उपभोग करें। परीक्षा जैसे तनावपूर्ण समय के दौरान, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और सी जैसे कुछ पानी में घुलनशील विटामिन के लिए शरीर की आवश्यकता, जस्ता जैसे खनिज बढ़ जाते हैं। ये अधिवृक्क हार्मोन के संश्लेषण और कार्य में मदद करते हैं जो मूल रूप से हमारे तनाव से लड़ने वाले हार्मोन हैं। ब्राउन राइस, नट्स, अंडे, ताजा सब्जी और फल मदद कर सकते हैं।
  4. मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ  का उपभोग करें: एंटीऑक्सिडेंट जैसे विटामिन ए, सी और ई मस्तिष्क की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कम करते हैं जो कि मुक्त कणों से लड़कर तनाव को बढ़ाते हैं। अंडे, मछली, गाजर, कद्दू, हरी पत्तेदार सब्जी, ताजे फल इस आवश्यकता को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। वे शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाने में भी मदद करते हैं और परीक्षा के दौरान बच्चे के बीमार पड़ने की संभावना को कम करने में मदद करते हैं।
  5. याददाश्त बढ़ाने वाले वाले खाद्य पदार्थ  का उपभोग करें। मुख्य रूप से मछली में पाए जाने वाले ओमेगा 3 फैटी एसिड को मस्तिष्क की कार्यक्षमता और याददाश्त बढ़ाने के लिए उपयोगी माना जाता है।  जैसे कि सामन (कच्ची मछली), हेरिंग (भिंग) या मैकेरल (चूड़ा)। यदि आप मछली नहीं खाते हैं या अच्छी मछली तक पहुंच नहीं रखते हैं, तो अपने आहार में ग्राउंड फ्लैक्स सीड्स (अलसी), कद्दू के बीज, तिल के बीज (तिल), सोयाबीन तेल, कैनोला तेल को शामिल करें। 
  6. परीक्षा के दौरान बाहर का खाना खाने से बचें। एग्जाम के समय होने वाले  तनाव के कारण शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कम हो जाती है और बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जितना हो सके बाहर का खाना खाने से बचें। 

एग्जाम के दौरान पौष्टिक भोजन !

परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान स्वस्थ खाने के कुछ उदाहरण 

नाश्ते मेंओट्स, मूसली, उपमा, खिचड़ी, इडली, अंडे, पोहा, इडली, डोसा, ढोकला
भोजनलाल मांस, अनाज और पालक, साबुत अनाज, गेहूं के बीज, अंडे और नट्स, मछली और सोया, ब्राउन चावल, ताजा सब्जियों और फलों, गाजर, कद्दू, अलसी, कद्दू के बीज, तिल के बीज (तिल), सोयाबीन का तेल, कैनोला तेल, दूध और दूध उत्पादों, स्प्राउट्स, तंबू, चिकन, दलिया, जई, क्विनोआ, और पूरे गेहूं उत्पादों जैसे अनाज।
स्नैक्ससेब, केला, गाजर या मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स, ताजे फल, फ्रूट स्मूदी, शहद में लिपटे नट्स, सूप, दिलचस्प सलाद, प्रोटीन बार, फ्रेश फ्रूट्स, मूंगफली, मखाना और चना, दूध और दूध से बने उत्पाद , स्प्राउट्स, टोफू, अंडे, चिकन, मछली, डलिया, जई, क्विनोआ 
हाइड्रेशनपानी, फलों का रस, दूध, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, मिल्कशेक, ताजा सूप, नींबू पानी, लस्सी और नारियल पानी। 
इनसे बचेंचॉकलेट, कुकीज़, वातित पेय, फास्ट फूड, भारी और तैलीय भोजन
परीक्षा के दौरान स्वस्थ भोजन । एक्जाम और तैयारी के दौरान स्वस्थ भोजन के कुछ स्वस्थ विकल्पों के उदाहरण।

Healthy Eating during Exams

 पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और उचित नींद लेना ताजे और स्वस्थ दिमाग की कुंजी है।

शुभकामनाएं।

जानिए अपने बच्चों को अनुशासन में लाने के  ऐसे आठ वैकल्पिक तरीके जब शारीरिक दंड देना आवश्यक नहीं है

अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की 9 टिप्स

होमवर्क का उद्देश्य क्या है?

These tips are useful for :परीक्षा, परीक्षा, भोजन, स्वस्थ भोजन, परीक्षा की तैयारी, foodduringexams, foodforexams, entrancetest, परीक्षण, स्कोरिंग, प्रवेश, माल, टॉपर्स, टॉपर, अनुरक्षण, 10thboard, cbseboard, cbseexams, IBboard, IPS, IAS, IIT, IIM, IIIT, GRE, NET, CET, AIFM, CAT, CMAT, MAT, GMAT, JEE, AIEEE, GATE, AIIMS, CLAT, TOEFL, SAT, PSU, BANKPO, DRDO, ISRO, ISRO, 10, 10 + 2, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, यूपीएससी, आईएफएस, पीएससी, एएओ, पोषक तत्व, पोषण, खाद्य, आदत, पालन-पोषण, 10tips, 5tips, टिप्स, टॉपटिप्स, नाश्ता, भोजन, नाश्ता पेय, जलयोजन, पालन-पोषण, परिणाम, परिणाम 2020, 2020, दसवीं,  12वीं, शासकीय परीक्षा, शिक्षा परिणाम, परीक्षा परिणाम, परीक्षा फल

क्या अनुशासन के लिए शारीरिक दंड ठीक है?

क्या अनुशासन के लिए शारीरिक  दंड ठीक है? Is Physical punishment OK to discipline your child?

माता-पिता आमतौर बच्चों या किशोरों पर अवांछित व्यवहार के जवाब में अनुशासित करने के लिए  शारीरिक दंड देते हैं।

लड़कों को लड़कियों की तुलना में अक्सर घर और स्कूल दोनों जगह ज्यादा शारीरिक दंड दीया जाता है। कुछ देशों ने बच्चों की पिटाई को घरों, स्कूलों सहित हर सेटिंग में  दंडनीय अपराध ठहराया है।

शारीरिक दंड में शारीरिक बल का उपयोग शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को शारीरिक दर्द या परेशानी का अनुभव होता है 

ऐसा  बच्चों के व्यवहार में सुधार लाने या उन्हें दंडित करने के लिए किया जाता है।

इसमें मारना,  नोचना, घसीटना, भूखे रखना इत्यादि शामिल हैं।  

क्या एक बच्चा को शारीरिक रूप से दंडित करना अथवा मारना कभी ठीक है? यह हर माता-पिता के लिए एक बड़ा सवाल है। 

मैंने इस प्रश्न को विभिन्न सामाजिक स्थलों के सर्वेक्षण के रूप में लिखा है और पाया कि वर्तमान समय में माता-पिता की मानसिकता बदल रही है

 हर  माता पिता   बच्चों को मार  कर सुधारने के पक्ष में नहीं है

 कोई भी अपने बच्चे को मज़े के लिए डांटना या मारना नहीं चाहता है। यह सवाल तब उठता है जब बच्चे के अनुशासन की बात आती है।

हालांकि अधिकांश लोग  बच्चों को शारीरिक दंड देने की बात पर इनकार करते हैं परंतु फिर भी बहुत से माता पिता बच्चों को अनुशासन सिखाते हुए गुस्से में थोड़ा हाथ उठाए देते हैं

 सिर पर छोटी सी  मार या धीरे से चिमटी काटना भी बच्चों को अनुशासित करने के वह तरीके हैं जो शायद शारीरिक दंड का ही रूप है

क्या अनुशासन के लिए शारीरिक  दंड ठीक है? माता-पिता आमतौर बच्चों या किशोरों पर अवांछित व्यवहार के जवाब में  शारीरिक दंड देते हैं।

शारीरिक दंड विरोधियों के अनुसार:

अधिकांश बाल मनोवैज्ञानिक, बाल रोग विशेषज्ञ, तथाकथित पैरेंटिंग विशेषज्ञ, शिक्षक और मध्यवर्गीय माता-पिता  जो शारीरिक दंड का विरोध करते हैं उनके अनुसार:

  • पिटाई से बच्चे को जीवन भर का भावनात्मक नुकसान हो सकता है। 
  • कभी-कभी यह शारीरिक नुकसान भी पहुंचा सकता है।
  • एक बच्चे को मारना उन्हें हिंसक वयस्क बनना सिखाता है।

 इसके अलावा, उनके अनुसार एक बच्चे को अनुशासित करने के लिए बहुत सारे अन्य तरीके अपनाए जा सकते हैं।

शारीरिक दंड के समर्थकों के विचार: 

शारीरिक दंड के समर्थक अक्सर वे होते हैं जो सोचते हैं कि यदि  वे अपने बचपन में मार खाकर अनुशासित हो सकते हैं तो उनके बच्चों को भी इस तरह अनुशासित करना ठीक है। 

  • समर्थकों का कहना है कि शारीरिक दंड मिलने के डर से बच्चे जल्दी अनुशासन में आ जाते हैं और उनको   अनुशासन भांग ना करने की बेहतर समझ पैदा होती है। 
  • यह भी तर्क है कि कभी-कभी जा बच्चा बेवजह या बुरी तरह से दुर्व्यवहार कर रहा होता है और माता-पिता के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। 
  •  समर्थकों का यह भी कहना होता है कि किस तरह उनका बच्चा मार खाकर तुरंत बात मान लेता है जबकि वे माता-पिता जो व्यवहार को बदलने के लिए शारीरिक दंड का उपयोग नहीं करते उनको अपने बच्चे को अनुशासित करने के लिए लंबे समय तक बार-बार एक ही बात  दौरानी होती है और यह भी पक्का नहीं होता कि बच्चा बात मानेगा या नहीं।

आज बाल अनुशासन के रूप में  शारीरिक दंड का उपयोग कौन करता है?

 यह जानना मुश्किल है कि वास्तव में कितने प्रतिशत माता-पिता या घर के अन्य सदस्य बच्चों को अनुशासित रखने के लिए शारीरिक दंड का उपयोग करते हैं परंतु फिर भी एक सूची जिसके अनुसार वह लोग जो कभी-कभार  बच्चों पर हाथ उठा ही देते होंगे:

  1. पुरानी पीढ़ी कैसे लोग जिनके बच्चे मार खाकर अनुशासित हो गए उन्हें लगता है कि बच्चों को मारना  ठीक है और इससे बच्चों को कोई नुकसान नहीं होता।
  2. वे सारे माता पिता जिन्हें उनके बचपन में शारीरिक दंड के द्वारा ही अनुशासित किया गया हो उनके अनुसार ऐसा करने पर बच्चे अनुचित कार्यवाही दोबारा नहीं दोहराते। 
  3. ऐसे माता-पिता जिनके बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और उन्हें खतरे से बचाने के लिए बच्चों को आमतौर पर एक थप्पड़ या हल्की मार देना जरूरी होता है। यह माता पिता इंगित करते हैं कि यदि बच्चा किसी खतरे में हो तो उसे रोकना बहुत जरूरी होता है इसके लिए मारना एक तुरंत किया गया उपाय होता है इसका एक उदाहरण वह माता-पिता है जो अपने बच्चे को आंख में हाथ डालने से रोकने के लिए हाथ पर जोर से मारते हैं और समझाते हैं कि आग में हाथ डालने पर इससे भी ज्यादा दर्द होगा।
  4. माता पिता  या कोई वयस्क अपने आउट ऑफ कंट्रोल बच्चे को तब भी मार देते हैं जब किसी और ने विधि का प्रयोग करने के बाद भी बच्चा जानबूझकर अपना व्यवहार दोहराता है। उदाहरण के लिए यदि एक बच्चा किसी मॉल या दुकान में जाकर वहां रखा सामान उठाकर जमीन पर आ सकता है और मना करने के बाद भी यही व्यवहार दौर आता है तो  सब को हो रही असुविधा को देखते हुए देखभाल करता या माता-पिता उसे मार देते हैं। 

बच्चों को शारीरिक दंड देकर अनुशासित करना सही है या गलत यह तब तक नहीं  तय किया जा पाएगा जब तक सोच दो वर्गों में बैठी रहेगी

 आज या समाज कहते हैं कि उन्हें अनुशासन के लिए शारीरिक दंड की आवश्यकता नहीं होती मगर फिर भी  यदि जीवन में उन्होंने कम से कम एक बार शारीरिक दंड की मदद से ही अपने बच्चे को अनुशासित किया है तो यह कहना मुश्किल है कि कब बच्चों बिना शारीरिक दंड के अनुशासित रखने की एक सोच समाज में स्थापित होगी

अभी भी देर नहीं हुए और  सभी धीरे-धीरे वैकल्पिक तरीकों को अपनाना शुरू कर सकते हैं

 जानिए अपने बच्चों को अनुशासन में लाने के  ऐसे आठ वैकल्पिक तरीके जब शारीरिक दंड देना आवश्यक नहीं है

जानिए परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन!


अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

शारीरिक सजा के बिनाअनुशासन के 8 वैकल्पिक तरीके

शारीरिक सजा इस देश में एक समस्या है।

शारीरिक दंड इस देश में एक समस्या है। जानिए अपने बच्चों को अनुशासन में लाने के  ऐसे आठ वैकल्पिक तरीके जब शारीरिक दंड देना आवश्यक नहीं है

किसी को अपने पति या पत्नी या किसी अजनबी को मारने की अनुमति नहीं है।  फिर क्यों दुनिया में एक छोटे और खुद से भी ज्यादा कमजोर बच्चे को मारने की अनुमति दी जानी चाहिए?  

अध्ययनों से पता चलता है कि जो बच्चे बचपन में आक्रामक  तरीकों से अनुशासित किए जाते हैं वे बड़े होकर अपने बच्चों और जीवन साथी  के साथ भी इसी तरह का दुर्व्यवहार करते हैं। वे विवादों से निपटने के के लिए हिंसक तरीकों का प्रयोग करना सीखते हैं।   

यदि बच्चे को मारना गलत नहीं है, तो कुछ भी गलत नहीं है। 

शारीरिक सजा सबसे व्यापक रूप से बहस और संवेदनशील पेरेंटिंग विषयों में से एक है। अधिकांश बाल रोग विशेषज्ञ और पेरेंटिंग विशेषज्ञ शारीरिक सजा की सलाह नहीं देते हैं। लेकिन अभी भी दुनिया भर में अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को पालने के लिए शारीरिक सजा के तरीकों का इस्तेमाल दबे छुपे करते हैं। यहां शारीरिक सजा में हम मारना, नोचना, दबोचना, धक्का देना शामिल करेंगे 

क्या एक बच्चे को  शारीरिक सजा देना ठीक है? 

हर माता-पिता के लिए यह एक बड़ा सवाल है। यह सवाल तब उठता है जब यह बच्चे के अनुशासन की बात आती है।

कई माता-पिता के लिए, थप्पड़ मारना बच्चे के व्यवहार को बदलने का सबसे तेज़ और सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।  पर इसका असर अक्सर अल्पकालिक होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि शारीरिक दंड बच्चों के लिए  जीवन में दीर्घकालिक दुष्परिणाम  छोड़ जाते हैं।

 यदि आप अपने बच्चे को अनुशासित करने के लिए शारीरिक सजा छोड़कर कोई भी दूसरा विकल्प खोज रहे हैं तो आप  इन 8 तरीकों का प्रयोग कर सकते हैं

 आइए जाने वह तरीके जिनके द्वारा बिना मारे आप बच्चों को अनुशासित कर सकते हैं: 

🙂टाइम-आउट – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

 बच्चों को अनुशासित करने के लिए या उनके दुर्व्यवहार को रोकने के लिए माता-पिता उन्हें  खुद ही मरते हैं। ऐसे में जब वे बच्चे को उसकी बहन को मारने से मना करते हैं तब यह बात बच्चा समझ नहीं पाता की मारना गलत क्यों है।

 ऐसे में टाइम आउट का  उपयोग एक बेहतर विकल्प है। टाइम आउट में आप कुछ समय तक बच्चे के साथ बातचीत बंद करते  है और उसे यह बताया जाता है कि जब तक बच्चा अपना व्यवहार ना सुधार ले बातचीत दोबारा चालू नहीं होगी

 लेकिन यह तरीका तभी प्रभावी हो सकता है जब माता पिता अपने बच्चे के साथ सकारात्मक समय बिताते हैं।

  यदि माता-पिता सामान्यता ही बच्चे के साथ बातचीत का समय नहीं निकाल पा रहे तो टाइम आउट का तरीका काम नहीं आएगा। यदि  इस तरीके का ठीक से उपयोग किया जाए, तो बच्चा खुद को शांत करना सीख जाएगा, जो एक उपयोगी जीवन कौशल है।

🙂चयनात्मक अनदेखी – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

जब बच्चा आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए दुर्व्यवहार कर रहा होता है तब आप उसकी अनदेखी करें। चयनात्मक अनदेखी वास्तव में शारीरिक सजा की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है।  इसका मतलब यह नहीं कि आपका बच्चा कुछ खतरनाक या अनुचित कर रहा है और आप जानकर भी उसकी तरफ नहीं देख रहे। 

इसका मतलब है कि उनकी गतिविधियों पर ध्यान न दें जब आपका बच्चा रोना, जमीन में लौटना या शिकायत करके ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करता है।  रोना, चीजें फेंकना, जमीन में लोटना यह कुछ ऐसे उदाहरण है जो व्यवहार बच्चा माता-पिता का ध्यान आकर्षित करने के लिए करता है।

 इस तरह के व्यवहारों पर कोई प्रतिक्रिया ना करें।

फिर, जब वह अच्छी तरह से पूछता है या वह व्यवहार करता है, तो अपना ध्यान उस पर लौटाएं। समय के साथ, वह सीखेगा कि विनम्र व्यवहार आपका ध्यान पाने का सबसे अच्छा तरीका है।  

 🙂सुविधा ले लो – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

हालांकि   मार 1 या 2 मिनट के लिए असर  करती है परंतु सुविधा छूट जाने का असर ज्यादा लंबा होता है। बच्चे को यह बताएं की  उसके किसी व्यवहार के कारण उससे कुछ सुविधाएं वापस ली जा रही है।

 दिनभर के लिए टीवी, वीडियो गेम, उसका पसंदीदा खिलौना या घर में साथ की जाने वाली कोई एक मजेदार गतिविधि करने की अनुमति नहीं दी जाएगीI बच्चा धीरे से  उन गलतियों को नहीं दोहराएगा जिससे उसकी सुविधाएं ले ली जाते हैं।

स्पष्ट करें कि विशेषाधिकार कब वापस अर्जित किए जा सकते हैं। आमतौर पर, 24 घंटे का समय आपके बच्चे को उसकी गलती से सीखने के लिए काफी लंबा होता है। 

🙂नया कौशल सिखाएं – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

शारीरिक सजा के साथ एक मुख्य समस्या यह है कि यह आपके बच्चे को बेहतर व्यवहार करने का तरीका नहीं सिखाती है। जब बच्चा जिद कर रहा था तब  आपने बच्चे की पिटाई कर दी, कुछ समय के लिए वह डर के मारे चुप हो गया।

 परंतु आपने बच्चे को यह नहीं सिखाया की अगली बार जब वह किसी कारण से परेशान हो तो वह खुद को कैसे शांत कर सकता है।

बच्चे को अनुशासित करने के लिए नए और सकारात्मक तरीकों का प्रयोग करें,  दंडात्मक तरीकों का नहीं।  उसे सिखाएं कि वह अपनी समस्या का कैसे हल निकाल सकता है। किस तरह उसे अपनी भावनाओं पर पकड़ बनानी होगी। और किस तरह कभी-कभी समझौता करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 

🙂तार्किक परिणाम  बताएं – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

जब बच्चा अपनी चीजों को व्यवस्थित सही जगह पर वापस नहीं रखता तब आप  बच्चे का सामान मत संभालिए।  उन्हें बताइए यदि आज   बच्चा सामान को निश्चित जगह पर नहीं रखेंगे तो कल उसे खोजने में उन्हें ही दिक्कत होगी । बच्चे के सोने के बाद आप  बच्चे का सामान कहीं और रख दें।

अगली बार  बच्चे को अपना सामान खुद ही खोजने  दे, सामान आसानी से नहीं मिलने पर बच्चा यह समझ पाएगा कि चीजों को संभाल कर रखना क्यों आवश्यक है। 

परिणाम को व्यवहार की समस्या से सीधे जोड़ने से बच्चों को यह देखने में मदद मिलती है कि यह प्रत्यक्ष परिणाम उनके ही द्वारा लिए गए निर्णय के फल स्वरुप हैं। 

🙂प्राकृतिक परिणामों की अनुमति दे – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

प्राकृतिक परिणाम बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने का मौका देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा कहता है कि वह जैकेट  नहीं पहनना चाहता तो आप उसे वैसे ही खेलने जाने दे, उसे बाहर जाकर जब ठंड लगेगी तब वह खुद समझ जाएंगे कि जैकेट पहनने क्यों कहा गया था।

इस तरीके का प्रयोग  करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा किसी वास्तविक खतरे में तो नहीं है।

 प्राकृतिक परिणामों का उपयोग  तब करें जब आपको लगता है कि आपका बच्चा अपनी गलतियों से सीखे।आप इस तरीके का उपयोग तब नहीं कर सकते जब उसके परिणाम स्वरूप बच्चे को चोट लग सकती या कोई बड़ी हानि हो सकती।  उदाहरण के लिए-  यदि बच्चा चाकू का प्रयोग कर रहा है तो आप यह कहकर नहीं छोड़ सकते कि बच्चा हाथ कटने पर खुद ही सीख जाएगा 

🙂अच्छे व्यवहार के लिए पुरस्कृत करें – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

बच्चे को गलत व्यवहार के लिए दंडित करने की बजाय अच्छे व्यवहार के लिए पुरस्कृत करें। उदाहरण के लिए, यदि आपका बच्चा अक्सर अपने भाई-बहनों के साथ लड़ता है तो यदि वह किसी समय अपने भाई बहनों की मदद करता है तो आप उस व्यवहार के लिए  अपने बच्चे को पुरस्कृत करें। 

 अच्छा व्यवहार करने पर एक प्रोत्साहन मिलने से  दुर्व्यवहार में तेजी से बदलाव आ सकता है।

पुरस्कार बच्चों को इस बात पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं कि उन्हें विशेषाधिकारों को अर्जित करने के लिए क्या करना चाहिए, बजाय इसके कि  उनको बुरे व्यवहार पर सजा दी जाएगी।

🙂बस बुराई ना खोजें – अनुशासन के वैकल्पिक तरीके

 बच्चे की उपस्थिति में किसी और के सामने अपने बच्चे की शिकायत ना करें।  इससे ना आपकी समस्या हल होगी और ना ही बच्चे का व्यवहार सुधरेगा ।अपितु बच्चे को सबके सामने हीन महसूस होगा।

 वह यह सोचने लगेगा कि यह  व्यवहार ही मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा है।

 जब कमरे में कई बच्चे होते हैं, तो उन बच्चों पर सबसे अधिक ध्यान दें और प्रशंसा करें जो नियमों का पालन कर रहे हैं और अच्छा व्यवहार कर रहे हैं। ऐसे में जाकर अपने बच्चे को यह ना बताएं कि देखो बस तुम ही अनुशासित नहीं हो ।  इसके बदले  उसे दिखाएं की अनुशासित रहने पर प्रशंसा  प्राकृतिक रूप से होगी ही।

हर माता-पिता अपने बच्चे को अनुशासित रखना और देखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि बच्चा उनकी उम्मीदों के हिसाब से ही चले।  बच्चों को अनुशासित रखना ठीक है परंतु उन्हें कुछ चीजें उनके हिसाब से भी करने दी जा सकती हैं। जब तक उनके किए गए कामों का कोई दुष्परिणाम नहीं हो रहा हो।  उदाहरण के लिए – यदि कोई बच्चा हर दिन अपना सामान संभाल कर रखता है। और किसी एक दिन अपने दोस्तों के साथ खेलने जाने की जल्दी में  वह अपना सामान नहीं संभाल पाता तो इसे अनुशासनहीनता ना समझे।

 हर अभिभावक  को अपने बच्चे को समझने का प्रयास भी करना चाहिए।

  बच्चा या  उससे संबंधित समस्याएं हर सुबह चाय के साथ उपभोग की जाने वाली बिस्किट नहीं है । इसका अभिप्राय यह है कि आप हर दिन बस अपने बच्चे की गलतियां  ही ना निकालते रहे।

कभी उनके साथ बैठकर उन्हें समस्याओं का हल निकालना भी सिखाए ।  हर बच्चा एक इंसान है, जिसके व्यक्तित्व का सम्मान करना हर माता-पिता के लिए भी जरूरी है।

जानिए परीक्षा के दौरान पौष्टिक भोजन!