गृह कार्य का उद्देश्य क्या है?

क्या आपको लगता है आपके बच्चे को गृह कार्य करने में परेशानी हो रही है?  यदि हां तो जाने की गृह कार्य देने का उद्देश्य क्या होता है- 

क्या आपको लगता है आपके बच्चे को गृह कार्य करने में परेशानी हो रही है?  यदि हां तो जाने की गृह कार्य देने का उद्देश्य क्या होता है-
गृह कार्य होमवर्क क्यों दिया जाता है?

होमवर्क या गृह कार्य क्यों दिया जाता है?

गृह कार्य देना या ना देना स्कूल या शिक्षक या अन्य किसी स्थानीय दृष्टिकोण पर आधारित होता है 

 कुछ शिक्षक  दूसरी कक्षा तक बच्चों को होमवर्क नहीं देते हैं

जबकि कुछ किंडर गार्डन में गृह कार्य देना आरंभ करते हैं

 कुछ शिक्षक होमवर्क बनाते हैं जबकि अन्य पहले से तैयार वर्कशीट का  उपयोग करते हैं

अभिभावक अपने बच्चों का गृह कार्य ना करें

 अधिकांश शिक्षक गृह कार्य का उपयोग यह जानने के लिए करते है कि बच्चा क्या और कितना जानता है

  वे नहीं चाहते कि माता-पिता अपने बच्चों का होमवर्क करें

शिक्षक अभिभावकों से आशा रखते हैं कि अभिभावक सुनिश्चित करें कि होमवर्क पूरा हो गया है

यदि  अभिभावकों को कोई गलती नजर आए तो वे उसकी समीक्षा करें 

अपने बच्चों का प्रयोजन कार्य / प्रोजेक्ट ना करें

 शिक्षक नहीं चाहते कि माता-पिता अपने बच्चों का प्रयोजन कार्य/ प्रोजेक्ट बनाएं

 अपितु वे चाहते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों का मार्गदर्शन करें और प्रोजेक्ट में लगने वाली आवश्यक वस्तुओं का प्रबंध करें

आप चाहे तो इसके बारे में शिक्षक से जानकारी लेकर अपने बच्चे के साथ इसकी समीक्षा करें

गृह कार्य एवं रोज की पढ़ाई करने के लिए घर का कोई एक स्थान निश्चित करें

 सभी बच्चों को एक ही चीज की जरूरत होती है और वह है एक साफ-सुथरी जगह

 लेकिन ध्यान रखें कि प्रत्येक बच्चा अलग तरीके से काम करता है

 कुछ अपना काम रसोई की मेज पर तो कुछ अपने कमरे की डेस्क पर करना पसंद करते हैं

स्वभाव को देखते हुए उसके बैठक की जगह और समय सुनिश्चित करें

 कुछ बच्चे स्कूल के ठीक बाद होमवर्क करना पसंद करते हैं

दूसरों को एक लंबे समय के ब्रेक की आवश्यकता होती है

कुछ बच्चों को  शाम को कुछ नाश्ता करने के बाद होमवर्क करना पसंद आता है

 यदि आपका बच्चा स्कूल से आने के बाद अन्य किसी  क्लासेस के लिए जाता है तो होमवर्क करने का कोई एक समय निर्धारित कर ले

 आप जो भी दिनचर्या चुनते हैं अपने बच्चे को उसके अनुसार कार्य करने में  मार्गदर्शन करें

जाने कि आपका बच्चा  कैसे सबसे अच्छा अध्ययन करता है

उदाहरण के लिए, 

  • कुछ बच्चे शब्दों को वर्तनी लिखकर 
  •  दूसरे उसे आंखें बंद करके और उन्हें चित्रित करके उन्हें जोर से कहते हुए सीखेंगे 
  • बच्चों को अध्ययन के लिए एक अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है
  •  कुछ बच्चे  संगीत सुनना चाहते हैं
  • कुछ को और के बीच में ही रह कर पढ़ने से मदद मिलती है 

 बच्चों को अनुकूल वातावरण चाहिए

 अपने बच्चे के व्यक्तित्व के अनुसार आप उन्हें घर का वातावरण  दे

अपने बच्चे के साथ है, मगर आसपास मंडे राय नहीं

 यह ध्यान रखें कि यह उनका कार्य है, आपका नहीं

आप उनके लिए तब उपलब्ध रहें जब उन्हें आपकी जरूरत हो

  एक्सपर्ट्स के अनुसार

एक आदर्श सेटअप में माता पिता अपना काम करते रहेंगे और बच्चा पास ही बैठा अपना ग्रह कार्य कर रहा होगा

लेकिन यह हमेशा संभव नहीं है

कई बार माता-पिता के पास अपने काम होते हैं

 उन्हें काम के सिलसिले में  घर से बाहर जाना पड़ता है या फिर मां को खाना पकाने के लिए रसोई में रहना होता है

यदि आप घर पर हैं तो अपने बच्चे को बताएं कि आप सहायता के लिए उपलब्ध है पर आप साथ में अपना भी काम कर रहे हैं

 यदि आप घर पर उपलब्ध नहीं है तो सुनिश्चित करें की एक विश्वसनीय वयस्क वहां हो जो कि आवश्यकता पड़ने पर बच्चे को होमवर्क में मार्गदर्शन दे सके

 यह भी याद रखें कि हर होमवर्क एक समान नहीं होता  इसलिए हर चीज पर आपके ध्यान की आवश्यकता नहीं होती

 मीडिया एक्स्पोज़र को सीमित  करें

जब आपका बच्चा होमवर्क करता है तो टीवी बंद कर दें। जब तक किसी जानकारी के लिए कंप्यूटर की आवश्यकता ना हो उसे भी बंद रखें

  बच्चे के होमवर्क शुरू करने से पहले आप उससे पूछ सकते हैं कि उसे अपना कार्य करने में कितना समय लगेगा

 याद रखें यदि कमरे में आप टीवी देख रहे हैं तो आपके बच्चे का ध्यान गृह कार्य में नहीं लगेगा

शिक्षक को बताएं कि आपने अपने बच्चे के गृह कार्य में उसकी कितनी मदद की है

यदि आपके बच्चे को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है या वास्तव में कुछ समझ में नहीं आया है तो शिक्षक को बताएं 

शिक्षक को सूचना देने के लिए आप निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं

  •  असाइनमेंट पर लिखें की कार्य अभिभावक की मदद से किया गया है  
  • डायरी में लिखे या अलग से नोट कॉपी में लगा दे 

शिक्षकों द्वारा होमवर्क करने के कई उद्देश्य हो सकते हैं

  • जिसमें अभ्यास करवाना या
  • देखना कि बच्चा कितना सीख चुका है
  • उसे किन  विषयों में मदद की आवश्यकता है मूलभूत कारण होते हैं

इस अद्भुत यात्रा में आप सभी को शुभकामनाएँ। 

यदि यह सुझाव आपको अपना उत्तर खोजने में मदद करते हैं तो कृपया पोस्ट को लाइक करें और कमेंट करें

 यदि प्रिंटिंग से संबंधित आपका कोई और प्रश्न है तो उसे भी कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं

To read in English: What the point of homework?

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Is Playschool Education Necessary?

Should you send your child to a playschool? Here's what you should consider before making the decision.
Is Playschool Education Necessary?

Should you send your child to a playschool? Here’s what you should consider before making the decision.


A few decades ago, the concept of playschools in India was unheard of, and few children, if any, attended playschool. Still, everyone grew up into mature, sensible, well read and well-spoken adults. Now however it seems as if every parent sends their pre-nursery child off to a playschool.

Most playschools in India are privately owned, and expensive. If you are wondering whether to send your child to a playschool or not, here’s what you should consider before making a decision.

Time

Do you have a lot of time that you can devote to your child?

If both you and your spouse are working and you don’t have a lot of spare time, you may not be around to teach your child much – with the result that when your child starts school he may lag behind his classmates who have attended playschool. However, if one spouse is a stay-at-home parent and has the time to attend to the children and teach them, you could consider not sending your child to a playschool. Remember that very young children too have an incredible ability to learn. Their brains are remarkably sharp, and it makes sense to put them in an environment conducive to learning at this young age.

Playschool Education – Academic routine

When deciding which playschool to send your child to, try and find something that isn’t very academically inclined. Your child shouldn’t be struggling, trying to learn something like math at such a young age. Instead, find a play school that focuses on letting a child have fun while learning.

Playschool Education – Social opportunities

Play schools also provide an opportunity for children to socialize with other children. In addition, he will also gradually get used to the concept of a classroom in an informal manner, making his transition into school that much easier. So, if you live in an isolated neighborhood or in a place where there are not many other children your child’s age, it makes sense to send your child to playschool. Your child will learn to interact with numerous children at a young age.

Yes, the social benefits of sending your child to playschool are undeniable, but don’t expect miracles. If your child is shy, sending him to playschool will not automatically transform him into a confident person. In addition, you may find that there are other ways to help your child socialize. If you have membership to your local club for example, you could consider enrolling your child in sports.

Routine

Sending your child to a playschool helps ease him into a routine earlier on. However, remember that even if your child doesn’t go to playschool initially, 12-14 years of schooling followed by college will get him accustomed to a routine anyway. Whether or not he continues with the discipline depends on his innate nature and the job he takes up – and not on whether he has been to playschool or not.

What’s the point of homework?

Happy childhood is every child’s right.

All the best wishes to you on this amazing journey. This will surely give us an easy life.

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What’s the point of homework?

Wondering how to help your children with homework — or how to get them to do it without a struggle? Here’s how.

Wondering how to help your children with homework — or how to get them to do it without a struggle? Here's how.

What’s the point of homework?

“Homework is designed to help students reinforce key concepts, process and solidify new information, provide time for extra practice of skills, and reflect on how much they’ve learned,” notes teacher Susan Becker, M.Ed. However, approaches to homework vary from district to district, school to school and teacher to teacher. Some schools don’t give children homework until the 2nd grade, others start in kindergarten. Some teachers create original homework, while other use or modify prepared work sheets.

Don’t do the homework for your child.

Most teachers use homework to find out what the child knows. They do not want parents doing their children’s homework but do want parents to make sure homework is completed and review any mistakes to see what can be learned from them.

Don’t take over your child’s projects.

Teachers do not want parents doing their kids’ projects. Instead, they want parents to support their kids’ learning and make sure they have what they need to accomplish a task. Check with your child’s teacher for his policy and review it with your child.

Set up a good space to work.

All children need the same thing: a clean, well-lit space. But keep in mind that each child may work differently; some will do their work at the kitchen table and others at their desks in their rooms.

Pay attention to your child’s rhythms and help him find the right time to begin his work.

Some children will work best by doing homework right after school; others need a longer break and must run around before tackling the work. Most will need a snack. If your child does after-school activities, set a homework time before or after the activity, or after dinner. Whatever routine you choose, help your child stick to it.

Find out how your child studies best.

“You should find the ways your child likes to study. For example, some kids will learn spelling words by writing them out, others by closing their eyes and picturing them and saying them aloud,” . “The sound environment is also important,” .”Some kids may want to listen to music, some are helped by being in the middle of noise, others need absolute quiet.” These are some of the advises by the experts.

Don’t hover — but stay close by.

Keep in mind that it’s their homework, not yours, but remain available in case you are needed. “The ideal set up would be for a parent to be reading nearby while the child is studying because then you both are doing your educational work together, but that’s not always possible,” says Michael Thompson, Ph.D. “A parent may be working out of the home, or need to be working in the home and cooking dinner. So if you are home, stay close, and if you are not there, have another adult check to make sure it’s going OK. And remember that all homework is not equal, so not everything will need your rapt attention.”

Limit media exposure.

Turn off the TV and the iPod when your child does homework. And the computer too, unless it’s being used for research. You might start by asking how much time he thinks he should spend on this, and negotiate from there. Remember, you have the final word. And keep in mind that if you watch TV when your child can’t, the plan may backfire.

Let the teacher know if you gave your child a lot of homework help.

“If your child needs extra help or truly doesn’t understand something, let the teacher know. Write on the assignment, ‘done with parental help,’ or write a separate note,” advises experts. If your child resists, explain that homework is used to practice what you know and to show the teacher what you need help learning more about — so it’s a parent’s job to let the teacher know.

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बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

खाना? मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

खाना? मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?बच्चों को खाना खिलाना, मां का दिन भर का सबसे बड़ा काम हो सकता है, और सबसे ज्यादा समय लेने वाला भी। इसी बीच जब बच्चे की थाली परोस दी गई है, पर वह नहीं खाता तो, मां, दिन भर उसके खाने की चिंता करती रहती है। ऐसे में एक प्रश्न जो मां के दिमाग में आता है –

मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

अक्सर इस प्रश्न के कई तरह के उत्तर मिलते हैं, जो, आस पास के लोग या घर के बड़ों के हम तक पहुंचते हैं।

अक्सर हम पूरे समय बच्चे के पीछे खाना लेकर घूमते रहते हैं। और कई बार हम बच्चे को जबरदस्ती खिलते है।

मुझे अपने बच्चे को कब खाना परोसना चाहिए?

अब आप ये तरीके भी अपनाकर देखें।

  • पूरे दिन खाने के लिए पीछे भागने के बदले, अपने बच्चे को दिन में 3 बार नाश्ता और 2 बार पूरा भोजन दें। 
  • हर दिन लगभग एक ही समय पर भोजन और नाश्ता परोसने का प्रयास करें। 
  • भोजन और नाश्ते का एक योजना बद्ध अनुकरण आपके बच्चे में खाने की आदतों को विकसित करने में मदद कर सकती है।
  • आपके बच्चे को आपके मुकाबले खाने में अधिक समय लग सकता है।
  •  उन्हें खाने को खत्म करने का समय दें। 
  • यदि आपको लगता है कि बच्चे का खाने में मन नहीं लग रहा और वो खाने से खेल कर रहा है, तो उसके सामने के खाना हटा दें, और उसको मेज से उतर कर खेलने छोड़ दें। 
  • इस तरह धीरे से बच्चा ये समझ जाएगा कि खेलना और खाना एक साथ नहीं हो सकता।
  • यदि बच्चे को कोई स्वस्थ से सम्बन्धित दिक्कत नहीं है, और वह रोज खेल कूद कर रहा है तो निश्चित रहें।
  •  बच्चे कभी भी भूखे नहीं रहते, वो अपनी आवशयकताओं के अनुसार खा लेते हैं।
  • बच्चे को दिन भर ना खिलाएं, इससे उन्हें भूख का अहसास नहीं होता।

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